भारत का सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण तेजी से नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, डेटा सेंटर और डिजिटल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निवेश भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
नैसकॉम के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का आईटी-बीपीएम उद्योग 282.6 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.1% की वृद्धि दर्शाता है। इस दौरान 224.4 अरब डॉलर का निर्यात और 58.2 अरब डॉलर का घरेलू राजस्व दर्ज किया गया। सेक्टर ने 1.26 लाख नई नौकरियां सृजित कीं, जिससे प्रत्यक्ष रोजगार 58 लाख से अधिक हो गया।
उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक एआई और डिजिटल तकनीकों के विस्तार से भारत में लगभग 2 करोड़ नई नौकरियों का सृजन हो सकता है। वहीं, वैश्विक एआई बाजार 2030 तक 1.8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का होने का अनुमान है, जिसमें भारतीय कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन के अनुसार, भारत के पास एआई क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा , खुले नियम , इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा एआई विकास के चार प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने बताया कि 2022 में केवल 20% कंपनियां एआई तकनीक का उपयोग कर रही थीं, जो 2024 में बढ़कर 44% हो गईं। 2025 तक 88% कंपनियों द्वारा किसी न किसी रूप में एआई अपनाई जबकि 71.7% कंपनियां पहले ही एआई को अपनी व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बना चुकी हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि 55% से अधिक आईटी कंपनियां एआई विशेषज्ञों की कमी का सामना कर रही हैं। भारत का AI इंजीनियरिंग स्किल इंडेक्स 2.8 है, जबकि अमेरिका और जापान जैसे देशों में यह 4 से अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के पास 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता, तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और हर वर्ष 15 लाख से अधिक इंजीनियरिंग स्नातक हैं, जो एआई विकास की मजबूत नींव प्रदान करते हैं। उनका कहना है कि यदि डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, अपस्किलिंग, रिस्किलिंग और अनुसंधान में निवेश बढ़ाया जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई और आईटी उद्योग में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है


