प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में India AI Impact Summit 2026 का औपचारिक उद्घाटन किया। हालांकि इसकी शुरुआत 16 फरवरी को ही हो गई थी। यह 21 फरवरी तक चलेगा। इस समिट में दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और जानी मानी टेक्नोलॉजी कंपनियों सहित सैकड़ों कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। उद्घाटन अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक AI Impact Summit भारत में आयोजित हो रहा है। भारत में विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी, सबसे बड़े तकनीकी प्रतिभा भंडार और समृद्ध प्रौद्योगिकी सक्षम इकोसिस्टम है। भारत न केवल नई प्रौद्योगिकियों का निर्माण करता है, बल्कि उन्हें तेजी से अपनाता भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 14 करोड़ भारतीय नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्राध्यक्षों, वैश्विक एआई इकोसिस्टम के नेताओं और नवप्रवर्तकों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना न केवल देश के लिए बल्कि विकासशील देशों के लिए भी गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि जहां नई तकनीकों को अक्सर शुरुआत में संदेह का सामना करना पड़ता है, वहीं जिस गति और विश्वास के साथ विश्व भर के युवा एआई को अपना रहे हैं, उस पर अपना अधिकार जता रहे हैं और उसका उपयोग कर रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री ने एआई शिखर सम्मेलन की प्रदर्शनी के प्रति उत्साह, विशेष रूप से युवा प्रतिभाओं की बड़ी भागीदारी की भी सराहना की।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में प्रस्तुत समाधान ‘मेड इन इंडिया’ की ताकत को दर्शाते हैं और एआई क्षेत्र में भारत की नवोन्मेषी क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों में एक ऐसा मोड़ आता है जो सभ्यता की दिशा बदल देता है। ऐसे क्षण विकास की गति को बदल देते हैं और सोचने, समझने और काम करने के तरीकों में बदलाव लाते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव सभ्यता के ऐतिहासिक मोड़ के समान ही व्यापक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती है। आज जो देखा और अनुमान लगाया जा रहा है, वह इसके प्रभाव के केवल प्रारंभिक संकेत हैं। एआई मशीनों को बुद्धिमान बना रही है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मानव क्षमता को कई गुना बढ़ा रही है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों को सौंपी जाने वाली एआई के स्वरूप के बारे में भी चिंता होनी चाहिए। असली सवाल यह नहीं है कि एआई भविष्य में क्या कर सकती है, बल्कि यह है कि मानवता वर्तमान में एआई काउपयोग कैसे करना चाहती है। परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मानवता ने इसकी विनाशकारी क्षमता और इसके सकारात्मक योगदान दोनों को देखा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी ए क परिवर्तनकारी शक्ति है, यदि दिशाहीन हो तो यह व्यवधान उत्पन्न करती है, लेकिन सही दिशा मिलने पर यह समाधान बन जाती है। ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट का मूल उद्देश्य इस बात पर विचार-विमर्श करना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मशीन केंद्रित के बजाय मानव केंद्रित, संवेदनशील और उत्तरदायित्वपूर्ण कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि मनुष्य केवल एआई के लिए डेटा प्वॉइंट या कच्चा माल बनकर न रह जाएं, इसलिए एआई का लोकतांत्रीकरण आवश्यक है। एआई को समावेशन और सशक्तिकरण के माध्यम के रूप में कार्य करना चाहिए, विशेष रूप से विकासशील देशों में। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज मानवता एआई को जिस दिशा में ले जाएगी, वही भविष्य तय करेगी।
प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के ‘मानव’ (MANAV) विजन को प्रस्तुत किया। एम यानी मोरल एंड एथिकल सिस्टम। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नैतिक दिशा-निर्देशों पर आधारित होनी चाहिए। ए यानी अकाउंटेबल गवर्नेंस जिसके तहत पारदर्शी नियम और सशक्त निगरानी होनी चाहिए। एन यानी नेशनल सॉवरेन्टी यानी डेटा उसके असली स्वामी का है। ए यानी एक्सेसिबल एंड इंक्लूसिव। इसका मतलब है एआई को एकाधिकार नहीं, बल्कि गुणक बनना चाहिए। वी फॉर वैलिड एंड लेजिटीमेट यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कानूनी और सत्यापन योग्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का यह मानव विजन 21वीं सदी की एआई-संचालित दुनिया में मानवता के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दशकों पहले जब इंटरनेट की शुरुआत हुई थी तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि इससे कितने रोजगार सृजित होंगे। यही स्थिति आज एआई के संदर्भ में भी है क्योंकि भविष्य में किस प्रकार के रोजगार सृजित होंगे, इसका पूर्वानुमान लगाना कठिन है। एआई में कार्य का भविष्य पूर्व निर्धारित नहीं है, बल्कि सामूहिक निर्णयों और कार्यों पर यह निर्भर करेगा। कार्य का भविष्य एक नया अवसर है जो एक ऐसे युग का प्रतीक है जहां मनुष्य और बुद्धिमान प्रणालियां सह-निर्माण, सह-कार्य और सह-विकास करेंगी। उन्होंने कहा कि एआई कार्य को अधिक स्मार्ट, अधिक कुशल और अधिक प्रभावशाली बनाएगा जिससे बेहतर डिजाइन, तेजी से निर्माण और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। एआई से ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए उच्च मूल्य, रचनात्मक और सार्थक अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा जिससे नवाचार, उद्यमिता और नए उद्योगों के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कौशल विकास, पुनर्विकास और आजीवन सीखने को जन आंदोलन बनाने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि एआई से दुनिया को तभी लाभ होगा जब इसे साझा किया जाएगा। ओपन कोड और साझा विकास से लाखों युवा एआई को बेहतर और सुरक्षित बनाने में सक्षम होंगे। उन्होंने एआई को वैश्विक हित के रूप में विकसित करने के लिए सामूहिक संकल्प का आह्वान किया।

बच्चों की सुरक्षा के महत्व पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार स्कूलों का पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है, उसी प्रकार एआई क्षेत्र भी बच्चों की सुरक्षा और परिवार के मार्गदर्शन में होना चाहिए। आज दो तरह के लोग हैं, एक वे जो एआई में डर देखते हैं और दूसरे वे जो इसमें भविष्य देखते हैं। प्रतिभा, ऊर्जा क्षमता और स्पष्ट नीति के बल पर भारत एआई में भविष्य और समृद्धि देखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। हमारे सुरक्षित डेटा सेंटर, एक मजबूत आईटी आधार और एक गतिशील स्टार्टअप देश को किफायती, स्केलेबल और सुरक्षित एआई समाधानों का एक स्वाभाविक केंद्र बनाते हैं।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का विषय है- सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, अर्थात् सभी का कल्याण, सभी की प्रसन्नता। इसका उद्देश्य भारत को एआई के क्षेत्र में अग्रणी के रूप में स्थापित करना है और एक ऐसे भविष्य की कल्पना करना है जहां एआई मानवता को आगे बढ़ाए, समावेशी विकास को बढ़ावा दे और हमारी साझा धरती की रक्षा करे।


