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PM मोदी-राष्ट्रपति मैक्रों वार्ता में हुए 20 समझौते, भारत-फ्रांस के बीच रक्षा से न्यूक्लियर तक मजबूत साझेदारी

भारत और फ्रांस के बीच 17 फरवरी 2026 को मुंबई में आयोजित द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में 20 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ को नई ऊंचाई देते हुए ‘होराइजन 2047 रोडमैप’ के क्रियान्वयन और भारत को वैश्विक उच्च-प्रौद्योगिकी निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का निर्णय लिया है।

Published: 13:06pm, 18 Feb 2026

17 फरवरी 2026 को मुंबई में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस गणराज्य के राष्ट्रपति श्री इमैनुएल मैक्रों के बीच द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों के संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा प्रदान किया गया। इस अवसर पर H125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया गया, जो टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस के संयुक्त उद्यम द्वारा कर्नाटक के वेमागल में स्थापित भारत का पहला निजी क्षेत्र का हेलीकॉप्टर निर्माण केंद्र है। यह हेलीकॉप्टर माउंट एवरेस्ट जैसी ऊंचाइयों तक उड़ान भरने में सक्षम है तथा हिमालयी क्षेत्र में निगरानी, रसद और सुरक्षा के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।

रक्षा सहयोग: खरीद से आगे को-डिजाइन और को-प्रोडक्शन

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को अब तक की सबसे मजबूत साझेदारी बताया गया। साझा बयान में स्पष्ट किया गया कि भविष्य में सहयोग केवल खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि को-डिजाइन, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर केंद्रित होगा।

26 राफेल-मैरीन फाइटर जेट्स के अनुबंध की पुष्टि के साथ ही जेट इंजन और हेलीकॉप्टर इंजन के संयुक्त विकास पर सहमति बनी। फ्रांसीसी सैफरन समूह और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मिलकर इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) के लिए इंजन विकसित करेंगे। इसके अतिरिक्त राफेल विमानों में प्रयुक्त एम-88 इंजन की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) सुविधा भारत में स्थापित की जाएगी।

टाटा समूह और एयरबस द्वारा भारत में एच-125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन की स्थापना निजी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर निर्माण की पहली ऐसी सुविधा है। भारतीय कंपनी बीईएल और फ्रांसीसी कंपनी सैफरन के बीच हैमर मिसाइल के निर्माण संबंधी समझौता भी रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

स्कॉर्पीन पनडुब्बी कार्यक्रम (P75) की सफलता को आगे बढ़ाते हुए नई पनडुब्बियों के निर्माण पर सहमति बनी। फ्रांस ने भारत के पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) में भी रुचि व्यक्त की है, जिससे भविष्य में भारतीय रक्षा प्रणालियां फ्रांसीसी सेना का भी हिस्सा बन सकती हैं।

परमाणु ऊर्जा: ऊर्जा सुरक्षा की नई आधारशिला

ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने दीर्घकालिक सहयोग का संकल्प दोहराया। भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। फ्रांस ने इस दिशा में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।

जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी तथा स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) और एडवांस्ड मॉड्यूलर रिएक्टर्स (AMR) जैसी उन्नत तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिए समझौता हुआ। भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और फ्रांस के सीईए के बीच शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक के उपयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति बनी।

यह सहयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि न्यूक्लियर साइंस, कौशल विकास और औद्योगिक अनुप्रयोगों को भी समाहित करेगा। इससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में उल्लेखनीय सहायता मिलेगी।

अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा में रणनीतिक समन्वय

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES के बीच दशकों पुराना सहयोग अब नए आयाम प्राप्त करेगा। संयुक्त उपग्रह विकास और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। वर्ष 2026 में ‘स्ट्रैटेजिक स्पेस डायलॉग’ का तीसरा सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें रक्षा अंतरिक्ष और उपग्रह सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। साइबर हमलों और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी। वर्ष 2026 में प्रस्तावित साइबर डायलॉग में उन्नत साइबर उपकरणों के प्रसार को रोकने पर विचार किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में सुरक्षित और विश्वसनीय तकनीक के विकास पर भी दोनों देशों ने साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

शिक्षा, नवाचार और जन-से-जन संपर्क

दोनों देशों ने वर्ष 2026 को ‘भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ घोषित किया है। स्वास्थ्य, सतत विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। एम्स दिल्ली और सोरबोन विश्वविद्यालय के बीच हेल्थकेयर में एआई आधारित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई।

फ्रांस ने वर्ष 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को अपने यहां आमंत्रित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारतीय छात्रों की सुविधा के लिए ‘इंटरनेशनल क्लासेस’ की शुरुआत की जाएगी। मुंबई में फ्रांस के शीर्ष बिजनेस और इंजीनियरिंग संस्थानों को जोड़ने हेतु एक नया हब स्थापित किया जाएगा।

जन-से-जन संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए ‘वीजा फ्री ट्रांजिट’ पायलट परियोजना प्रारंभ की गई है, जिसके अंतर्गत भारतीय नागरिक फ्रांस के हवाई अड्डों से बिना ट्रांजिट वीजा के गुजर सकेंगे। छह माह की परीक्षण अवधि के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।

डिजिटल भुगतान और अवसंरचना सहयोग

फ्रांस, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को अपनाने वाला पहला यूरोपीय देश बन गया है। पेरिस के प्रमुख स्टोर्स में भारतीय पर्यटक अब यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। इस व्यवस्था को और विस्तारित करने पर सहमति बनी है।

रेलवे क्षेत्र में हाइड्रोजन संचालित ट्रेनों और हाई-स्पीड रेल अवसंरचना विकास में सहयोग पर भी चर्चा हुई। चेन्नई और ला रियूनियन के बीच नई उड़ान सेवा प्रारंभ करने से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

होराइजन 2047 रोडमैप: दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि

दोनों देशों ने ‘होराइजन 2047 रोडमैप’ को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिसका उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक बहुआयामी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना है। यह रोडमैप केवल व्यापार विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिर और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने का भी लक्ष्य रखता है।

वार्षिक विदेश मंत्रिस्तरीय संवाद की शुरुआत के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा, वैश्विक मुद्दों और जन-से-जन संपर्क की नियमित समीक्षा की जाएगी। इस प्रकार भारत और फ्रांस की साझेदारी अब रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी से आगे बढ़कर वैश्विक नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है।

YuvaSahakar Desk