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सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन का वैश्विक मंच बनेगा को-ऑप कुंभ 2025, अमित शाह करेंगे उद्घाटन

1,500 शहरी सहकारी बैंकों, 60,000 क्रेडिट सोसाइटीज़ और कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की भागीदारी के साथ “को-ऑप कुंभ 2025” एक ऐतिहासिक मंच बनेगा जो आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में सहकारिता की भूमिका को सशक्त रूप से पुनर्स्थापित करेगा।

Published: 11:16am, 07 Nov 2025

सहकारिता के क्षेत्र में भारत की प्रगति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंकों एवं क्रेडिट सोसायटीज महासंघ (NAFCUB) द्वारा 10-11 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘को-ऑप कुंभ 2025’ आयोजित किया जाएगा। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में 6 नवम्बर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इसकी औपचारिक घोषणा की गई। यह सम्मेलन सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

NAFCUB, जो देशभर के 1,500 से अधिक शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) और लगभग 60,000 क्रेडिट सोसाइटीज़ का प्रतिनिधित्व करता है, इस आयोजन को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के उत्सव के रूप में भी मना रहा है। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘Digitalizing Dreams – Empowering Communities’ रहेगा, जिसका उद्देश्य डिजिटल और समावेशी सहकारी ऋण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

NAFCUB के अध्यक्ष लक्ष्मी दास ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा-

“को-ऑप कुंभ 2025 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि डिजिटल युग में सहकारी वित्त को पुनर्परिभाषित करने का सामूहिक आंदोलन है। संवाद, नवाचार और साझा दृष्टिकोण के माध्यम से हम वित्तीय समावेशन और सामुदायिक सशक्तिकरण की नई नींव रख रहे हैं।”

इस दो दिवसीय आयोजन में नीति नवाचार, सुशासन, तकनीकी प्रगति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। चर्चाओं में यह भी विचार किया जाएगा कि “सहकार से समृद्धि” मिशन के अनुरूप कैसे पारदर्शिता को बढ़ाया जाए, व्यावसायिकता को प्रोत्साहित किया जाए और सहकारी बैंकों एवं क्रेडिट सोसाइटीज़ के डिजिटल परिवर्तन को तीव्र किया जाए।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि समापन सत्र की अध्यक्षता सुरेश प्रभु करेंगे।

‘को-ऑप कुंभ 2025’ की एक प्रमुख विशेषता ‘दिल्ली घोषणा 2025 – रोडमैप टू 2030’ का अंगीकरण होगा। यह दूरदर्शी नीति दस्तावेज सहकारी संस्थाओं में सुशासन, पूंजी पर्याप्तता, जोखिम प्रबंधन तथा डिजिटल समावेशन को सुदृढ़ करने की रणनीतियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करेगा, जो सहकारिता क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेगा।

विभिन्न सत्रों में निम्न विषयों पर विचार-विमर्श होगा-

  • सहकारी बैंकिंग में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और प्रोफेशनलिज़्म

  • NUCFDC की भूमिका एवं सहकारिताओं के बीच सहयोग

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल नवाचार

  • सहकारिताओं में महिलाओं और युवाओं की भूमिका

  • अंतर्राष्ट्रीय संवाद के अंतर्गत क्रेडिट यूनियनों और वित्तीय समावेशन

वर्ल्ड काउंसिल ऑफ क्रेडिट यूनियंस (WOCCU), ग्रीनस्टोन फार्म क्रेडिट सर्विसेज (USA) तथा भारत की अग्रणी सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि इसमें भाग लेंगे।

NAFCUB के उपाध्यक्ष ज्योतिन्द्र मेहता, अध्यक्ष, NUCFDC ने कहा-

“को-ऑप कुंभ 2025 विचारों, नवाचार और समावेशन का संगम है। यह सहकारी ऋण आंदोलन के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगा, जहाँ तकनीक और विश्वास एक साथ मिलकर हर नागरिक की समृद्धि सुनिश्चित करेंगे।”

सम्मेलन के संभावित परिणामों में “दिल्ली घोषणा 2025” का अंगीकरण, सहकारिता मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक और राज्य सरकारों के लिए नीतिगत अनुशंसाएँ, देशी–विदेशी सहकारी संस्थाओं के बीच नई साझेदारियाँ (MoUs), डिजिटल नवाचार पर आधारित ज्ञान–संग्रह और महिला व युवा नेतृत्व का सशक्तिकरण शामिल होंगे।

1,500 से अधिक शहरी सहकारी बैंक, 60,000 क्रेडिट सोसाइटीज़ और WOCCU, ICA, ICBA, ACCU जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी के साथ को-ऑप कुंभ 2025 सहकारिता के वैश्विक नेतृत्व में भारत की भूमिका को नए सिरे से स्थापित करेगा।

NAFCUB की इस पहल के माध्यम से सहकारी क्षेत्र को समावेशी, नैतिक एवं डिजिटल रूप से सशक्त वित्तीय मॉडल के रूप में वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सतत विकास एवं सामुदायिक लचीलापन को गति मिलेगी। यह आयोजन न केवल सहकारी संस्थाओं को डिजिटल क्रांति से जोड़ेगा, अपितु वित्तीय समावेशन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सहकारिता की भूमिका को और सुदृढ़ करेगा।

YuvaSahakar Desk

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