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गुवाहाटी वैश्विक मसाला सम्मेलन में दिखा भारत का दबदबा, मसाला उद्योग में गुणवत्ता, पारदर्शिता और सुरक्षा पर वैश्विक सहमति

भारत की पहल पर 2013 में स्थापित CCSCH ने अब तक काली मिर्च, हल्दी, जीरा, जायफल, इलायची और केसर सहित 16 प्रमुख मसालों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित कर चुके हैं। गुवाहाटी सत्र में बड़ी इलायची, दालचीनी, सूखा धनिया तथा स्वीट मजार जैसे उत्पादों के लिए नए मानकों पर गहन चर्चा की हुई।

Published: 16:39pm, 16 Oct 2025

भारत ने एक बार फिर वैश्विक मसाला उद्योग में अपनी सशक्त स्थिति का प्रदर्शन किया है। गुवाहाटी में ‘कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेज एंड कुलिनरी हर्ब्स (CCSCH)’ के आठवें सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें 27 देशों के 81 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह आयोजन स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा किया गया। समिति का मुख्य उद्देश्य मसालों और कुलिनरी हर्ब्स के लिए एकीकृत और वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक तय करना है, जिससे वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, निष्पक्ष व्यापार और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ावा मिल सके।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी ने बताया कि वर्ष 2024 में वैश्विक मसाला उद्योग का मूल्य 28.5 अरब डॉलर है, जो 2033 तक बढ़कर 41.9 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि मसालों की गुणवत्ता के लिए वैज्ञानिक और समान मानक तैयार किए जाएं, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास और व्यापारिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

स्पाइस बोर्ड की सचिव पी. हेमलता ने कहा कि कोडेक्स मानक वैश्विक खाद्य व्यापार में न्याय, पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत के नेतृत्व में गठित यह समिति विश्व खाद्य और कृषि संगठन (FAO) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन के अंतर्गत कार्य करती है।

भारत की पहल पर गठित यह समिति अब तक काली मिर्च, हल्दी, जीरा, जायफल, इलायची और केसर सहित 16 प्रमुख मसालों के अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक तय कर चुकी है। गुवाहाटी में आयोजित वर्तमान सत्र में बड़ी इलायची, दालचीनी, सूखा धनिया और स्वीट मजारम जैसे मसालों के लिए नए मानकों पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के दौरान यह भी सहमति बनी कि वैश्विक मसाला व्यापार को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न देशों के बीच सहयोग आवश्यक है। इससे न केवल उत्पादन और प्रसंस्करण में सुधार होगा बल्कि गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन और उपभोक्ता सुरक्षा को भी नई दिशा मिलेगी।

इस सत्र के माध्यम से भारत ने न केवल मसालों के अंतरराष्ट्रीय मानक निर्धारण में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को पुनः स्थापित किया है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा और व्यापारिक संतुलन की दिशा में भी एक नया अध्याय जोड़ा है।

YuvaSahakar Desk