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प्रेरक है नौशीन नाज का सिवनी में सब्जी बेचने से अंडर 18 महिला राष्ट्रीय हॉकी शिविर तक का सफर

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले की 15 वर्षीय हॉकी खिलाड़ी नौशीन नाज की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। सब्जी बेचने और टूटी हॉकी से अभ्यास करने वाली नौशीन ने राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक गोल दागकर अपनी प्रतिभा साबित की है। वर्तमान में वे पूर्व कप्तान रानी रामपाल के मार्गदर्शन में भारतीय अंडर-18 टीम में जगह बनाने के लिए कड़ा अभ्यास कर रही हैं।

Published: 17:56pm, 29 Apr 2026

नई दिल्ली, 29 अप्रैल, 2026: मध्यप्रदेश के छोटे से आदिवासी जिले सिवनी के सब्जी बेचने वाले की बेटी 15 बरस की स्ट्राइकर नौशीन नाज ने अभावों और व्यवस्था से लड़ कर खुद का हॉकी में एक अलग मुकाम बनाया है। नौशीन नाज ने 16वीं सब जूनियर महिला राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप 2026 में मध्य प्रदेश की नुमाइंदगी कर सबसे ज्यादा नौ गोल दागे। नौशीन नाज फिलहाल साई (SAI), भोपाल में अंडर-18 महिला राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में भारत की पूर्व महिला हॉकी कप्तान रानी रामपाल के मार्गदर्शन में अपना हॉकी कौशल निखार रही हैं। मध्यप्रदेश के छोटे से शहर सिवनी से अंडर-18 महिला राष्ट्रीय हॉकी शिविर तक का नौशीन नाज का सफर बेहद प्रेरक है। नौशीन नाज ने कभी अपने पिता के साथ सब्जी तक बेची।

नौशीन नाज ने मात्र दस बरस की उम्र में अपनी बड़ी बहन ताहूर नाज को हॉकी खेलता देखकर जब हॉकी खेलनी शुरू की तब उनके पास हॉकी तक नहीं थी। नौशीन नाज बताती हैं, ‘मैंने अपनी बड़ी बहन से कहा कि मैं भी हॉकी खेलना चाहती हूँ लेकिन हमारे पास न तो पैसा है न ही हॉकी स्टिक। मुझे मैदान पर एक टूटी हॉकी मिली और मैं इसे घर ले आई। मैं इस टूटी-फूटी हॉकी को लेकर एक लोहार के पास गई और कील से इसके टुकड़ों को जोड़कर इसे हॉकी खेलने लायक बनाया। मैंने टूटी-फूटी, ठीक की हुई इस हॉकी से साल भर अभ्यास किया। आखिरकार एक डे-बोर्डिंग प्रोग्राम में मुझे खेलने को सही हॉकी मिल गई।’

नौशीन बेहद गरीब परिवार से हैं। नौशीन की राह बहुत से आर्थिक अभावों ने और मुश्किल बना दी। उनके पिता ने कभी सब्जी बेची और कभी ट्रक चलाया। नौशीन के पिता परिवार को चलाने के लिए डिब्बे एक से दूसरी जगह पहुँचाने का काम करते हैं। आर्थिक तंगी के साथ नौशीन को अपने गृह नगर में सामाजिक संघर्ष भी झेलने पड़े।

नौशीन बताती हैं, ’मैं बहुत गरीब परिवार से हूँ। हमारे समुदाय में बहुत कम लोग हैं जो लड़कियों को खेलने के लिए उनकी हौसला-अफजाई करते हैं। लोग कहते हैं कि लड़कियों को खेलने के लिए घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। हालात इतने बिगड़े कि मैंने दो बरस तक खेलना छोड़ दिया और सब्जियां बेचने में अपने पिता की मदद की। ऐसी मुश्किल घड़ी में मेरी मां मेरे समर्थन में खड़ी हुई। मेरी मां ने मेरे पिता से कहा कि यह सोचना छोड़ कर कि लोग क्या कहते हैं, उन्हें अपनी बेटियों का साथ देना चाहिए। मैं अपनी मां से मिले साथ के कारण ही ग्वालियर हॉकी अकादमी में शामिल होने के साथ शिविर में जगह बना सकी।‘

नौशीन अब भारत की पूर्व महिला हॉकी कप्तान ओलंपियन रानी रामपाल के मार्गदर्शन में भोपाल में हॉकी शिविर में शिरकत कर रही हैं। नौशीन का ध्यान अपनी बेसिक्स बेहतर करने पर है। नौशीन—एक ऐसी लड़की के लिए जिसने अपने जूते टूट जाने पर कभी अपनी साथी खिलाड़ियों से जूते उधार लिए—अब अपनी आदर्श रानी रामपाल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही है और उनके लिए यह जिंदगी बदलने वाला अनुभव है। नौशीन कहती हैं, ‘मैंने रानी रामपाल से बहुत कुछ सीखा। रानी जी बहुत ही बढ़िया ढंग से यह बताती हैं कि दौड़ते हुए गेंद ठीक ढंग से कैसे रोकनी है और कैसे आगे बढ़ाना है। रानी रामपाल भारत के लिए सर्वोच्च स्तर पर हॉकी खेली हैं और वह जानती हैं कि आगे उस मुकाम तक पहुँचने के लिए क्या करना है। मैं इसीलिए रानी रामपाल की तरह बनना चाहती हूँ।’

जिंदगी की चुनौतियों, किराये के घर में रहते और सीमित साधनों के बावजूद नौशीन पूरी तरह फोकस हैं और उनकी निगाहें अंडर-18 महिला हॉकी एशिया कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने पर हैं। नौशीन नाज कहती हैं, ‘मेरा लक्ष्य भारत के लिए हॉकी खेलना है, जिससे कि मैं अपने माता-पिता की मदद कर सकूँ। मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूँ कि मेरे पिता अब और काम न करें। मैं हर किसी को दिखाना चाहती हूँ यदि आपके पास खेलने का जिगरा है तो फिर आपको खेलने से कोई नहीं रोक सकता।’

YuvaSahakar Desk