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खत्म होगी पेट्रोल की टेंशन, 100% शुद्ध इथेनॉल और बायोडीजल से गाडियां दौड़ाने की तैयारी

भारत सरकार पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य प्राप्त कर चुकी है, जो गन्ना, मक्का तथा चावल जैसे स्रोतों से उत्पादित होता है। इस पहल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में कमी आई है और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में सहायता मिली है।

Published: 15:09pm, 30 Apr 2026

भारत सरकार ने देश के परिवहन क्षेत्र को हरित और अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में व्यापक संशोधनों का एक मसौदा (Draft Notification) जारी किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल के उच्च मिश्रण और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना है, जिससे भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल और शुद्ध बायोफ्यूल आधारित वाहनों का रास्ता साफ होगा।

वैकल्पिक ईंधनों को मिलेगी औपचारिक मान्यता

मंत्रालय द्वारा 27 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य E85 (85% इथेनॉल मिश्रण) और E100 (लगभग शुद्ध इथेनॉल) जैसे उच्च-सांद्रता वाले ईंधनों को औपचारिक रूप से नियमों के दायरे में लाना है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण के अनुकूल अन्य विकल्पों जैसे B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-संपीड़ित प्राकृतिक गैस (H-CNG) को भी इन नियमों में शामिल किया गया है। अब तक सरकारी नियम मुख्य रूप से E10 और E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) तक ही सीमित थे, लेकिन नए बदलावों के बाद दोपहिया, तिपहिया और भारी वाहनों सहित सभी श्रेणियों में उच्च मिश्रण वाले ईंधनों का उपयोग संभव हो सकेगा।

वैश्विक मानकों के अनुरूप वाहन श्रेणियों में बदलाव

ड्राफ्ट नियमों में केवल ईंधन ही नहीं, बल्कि वाहनों के भार मानकों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। हल्के वाणिज्यिक वाहनों (LCVs) के लिए अधिकतम भार सीमा को 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम करने का सुझाव दिया गया है। इस बदलाव से वैश्विक स्तर पर प्रचलित पिकअप, वैन और छोटे ट्रकों को समान उत्सर्जन परीक्षण मानकों के दायरे में लाया जा सकेगा, जिससे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

इथेनॉल उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा

भारत ने हाल ही में E20 का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया है, जिससे कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कमी आई है। वर्तमान में भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 20 अरब लीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि E20 के लिए मांग केवल 11 अरब लीटर के आसपास है। ऐसे में E85 और E100 जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना अधिशेष क्षमता (Surplus Capacity) के सही उपयोग के लिए अनिवार्य है। यह गन्ने, मक्के और चावल के किसानों के लिए भी आय का नया जरिया बनेगा।

चुनौतियां और सार्वजनिक परामर्श

यद्यपि यह कदम ब्राजील की तर्ज पर भारत को फ्लेक्स-फ्यूल के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके साथ कई तकनीकी और सामाजिक चुनौतियां भी जुड़ी हैं। ईंधन के लिए खाद्यान्न के बढ़ते उपयोग से उत्पन्न ‘फूड बनाम फ्यूल’ की बहस, अत्यधिक जल दोहन और पुराने वाहनों की उच्च इथेनॉल मिश्रण के साथ अनुकूलता (Compatibility) जैसे मुद्दे सरकार के सामने होंगे।

सरकार ने इस मसौदे को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। अगले 30 दिनों के भीतर आम जनता और उद्योग विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का विश्लेषण करने के बाद ही इन नियमों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

YuvaSahakar Desk