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श्वेत क्रांति 2.0: अगले 5 वर्षों में दूध की खरीद में 50% वृद्धि का लक्ष्य

सहकारिता मंत्रालय ने पिछले चार वर्षों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी, मत्स्य, सहकारी बैंक, चीनी सहकारी समितियों, और शासन प्रणालियों को सशक्त करने के लिए 100 से अधिक पहल शुरू की हैं। इन पहलों में डिजिटल सुधार, नीतिगत परिवर्तन, वित्तीय सहायता, और संस्थागत क्षमता निर्माण शामिल हैं।

Published: 11:17am, 09 Aug 2025

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सहकारिता मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस अहम बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल व मुरलीधर मोहोल, मंत्रालय के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए मंत्रालय की विभिन्न पहलों की समीक्षा और आगे की योजना पर विचार-विमर्श करना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य सहकारी समितियों को न सिर्फ जीवंत व्यवसायिक इकाइयों के रूप में विकसित करना है, बल्कि उन्हें सतत एवं व्यापक विकास के रास्ते पर ले जाना भी है। अमित शाह ने अपने उद्बोधन में सभी सदस्यों से अपने-अपने राज्यों में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने का आग्रह किया, ताकि सहकारिता का दायरा और प्रभाव क्षेत्र व्यापक हो। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने पिछली चार वर्षों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी, मत्स्य, सहकारी बैंक, चीनी सहकारी समितियों सहित विभिन्न सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए सौ से अधिक पहलें की हैं।

राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 एक व्यापक रोडमैप के रूप में तैयार की गई है, जो देश में सतत सहकारी विकास की दिशा में काम करेगी। इस नीति के माध्यम से सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) और अन्य योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित कर सहकारी इकोसिस्टम को जमीनी स्तर पर मज़बूती प्रदान करने की योजना बनाई है।

श्वेत क्रांति 2.0 के तहत अगले पांच वर्षों में दूध की खरीद में 50% की वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 15,691 नई डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं, वहीं 11,871 मौजूदा समितियों को और अधिक सशक्त बनाया गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और 15 राज्यों के 25 दूध संघों ने डेयरी सहकारी समितियों में बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे सहकारी समितियों की ऊर्जा तथा आर्थिक स्वाबलंबन बढ़ेगा।

बैठक में सहकारिता मंत्रालय ने पिछले चार वर्षों के दौरान की गई विभिन्न पहलों पर भी समिति को विस्तार से अवगत कराया। प्रभावी कार्यान्वयन एवं मॉनिटरिंग के लिए कई संस्थागत तंत्र जैसे अंतर–मंत्रालयी समिति (IMC), राष्ट्रीय स्तर समन्वय समिति (NLCC), राज्य सहकारी विकास समितियां (SCDC) तथा जिला सहकारी विकास समितियां (DCDC) गठित की गई हैं। डिजिटल सुधार, नीतिगत परिवर्तन, वित्तीय सहायता और संस्थागत क्षमता निर्माण इन पहलों के मुख्य अंश हैं।

YuvaSahakar Desk