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मसूरी में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न, हर गांव में सहकारी समिति बनाने का संकल्प

डॉ. भूटानी ने संशोधित मॉडल उप-नियमों को शीघ्र लागू करने और जिला कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने सहकारिता सिद्धांतों पर आधारित क्षमता विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता जताई और #EkPedMaaKeNaam2.0 जैसे अभियान को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के पूर्वाभास के रूप में चलाने का सुझाव दिया।

Published: 14:28pm, 21 Jul 2025

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में सहकारिता मंत्रालय की दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय समीक्षा बैठक का समापन एक संकल्प के साथ हुआ। बैठक के समापन समारोह में सचिव डॉ. आशिष कुमार भूटानी ने देश के हर गांव में सहकारी समितियों की स्थापना को मिशन मोड में लागू करने का आह्वान किया, जिससे भूमिहीन किसानों की भागीदारी और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिल सके।

डॉ. भूटानी ने संशोधित मॉडल उप-नियमों को शीघ्र लागू करने और जिला कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने सहकारिता सिद्धांतों पर आधारित क्षमता विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता जताई और #EkPedMaaKeNaam2.0 जैसे अभियान को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के पूर्वाभास के रूप में चलाने का सुझाव दिया।

सचिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनशील विकास को रेखांकित करते हुए आत्मनिर्भर एवं समावेशी सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना रखी।

बैठक में संस्थागत मजबूती, नवाचार और क्षेत्रीय समन्वय पर आधारित कई उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किए गए। एक विशेष सत्र में आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर डॉ. राजेश चंदवानी ने रणनीतिक मानव संसाधन विकास पर प्रस्तुति दी, जिसमें आधुनिक एचआर नीतियों और नेतृत्व मॉडल को अपनाने पर बल दिया गया। इस सत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

एक अन्य महत्वपूर्ण कार्यशाला में सहकारी बैंकों को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता मंत्रालय के अपर सचिव और एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक श्री पंकज कुमार बंसल ने की। इस दौरान TAFCUB (टास्क फोर्स ऑन अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स) को पुनर्जीवित करने, स्टेट कोऑपरेटिव बैंकों की Shared Services Entity में भागीदारी बढ़ाने और NUCFDC के साथ सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

NAFCUB, NABARD और NUCFDC सहित विभिन्न संस्थाओं ने विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं, जिसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों के साथ पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा में बेहतर शासन, तकनीकी अपनाने और वित्तीय स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया गया।

एक अन्य सत्र में सहकारी क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं जैसे NCEL, NCOL, BBSSL, NCCF और NAFED की भूमिका की समीक्षा की गई। साथ ही, सहकारी नेटवर्क के माध्यम से ग्रेन स्टोरेज प्लान की प्रगति पर चर्चा हुई।

राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस और PACS को मजबूत करने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई, जिसमें विभिन्न योजनाओं के समन्वय की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित किया गया।

प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय सहकारी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य करने और सार्वभौमिक पहुंच को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई। विचार-विमर्श में राज्यों के बीच ज्ञान साझाकरण, क्षेत्रों के बीच एकीकरण और रणनीतिक योजना की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि सहकारी संस्थान ग्रामीण और आर्थिक विकास के सशक्त साधन बन सकें।

Diksha