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बिहार की पैक्स समितियां बनेंगी ग्रामीण पर्यटन का नया चेहरा, होम स्टे और टूर गाइड से बढ़ेगा स्वरोजगार

बिहार सरकार ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को पर्यटन, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास से जोड़ते हुए एक नई सहकारी पहल शुरू की है। साथ ही मखाना किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 5 लाख रुपये तक ऋण और ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

Published: 09:00am, 29 May 2025

बिहार सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में एक दूरदर्शी और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को पारंपरिक खेती और कृषि ऋण प्रदान करने की भूमिका से आगे बढ़ाकर पर्यटन, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी सक्रिय भागीदारी देने का निर्णय लिया है। सहकारिता विभाग ने इस नई पहल को लागू करने के लिए राज्य की सभी पैक्स समितियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जा सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें।

इस निर्णय के तहत, पैक्स समितियां अब अपने क्षेत्रों में होम स्टे सुविधा, टूर पैकेज तैयार करना, ट्रैवल गाइडिंग और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में कार्य करेंगी। इसके लिए समितियों को आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण प्रदान किए जाएंगे। यदि आवश्यकता पड़ी तो नई सहकारी समितियों का गठन कर इस पहल को और विस्तार दिया जाएगा। इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही, पर्यटन से जुड़े कार्यों के लिए युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आएगी।

इसके अतिरिक्त, सहकारिता विभाग ने बिहार के प्रसिद्ध उत्पाद मखाना को बढ़ावा देने के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मखाना उत्पादक किसानों को अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत 5 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाएगा। इस योजना को लागू करने के लिए जिला सहकारी बैंकों को निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य मखाना किसानों को प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग सेंटर और ब्रांडिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें। इससे मखाना सीधे बाजारों तक पहुंचेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी।

यह पहल बिहार में सहकारी तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन के माध्यम से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। यह सहकारी मॉडल ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और सतत विकास के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा।

YuvaSahakar Desk

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