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श्वेत क्रांति 2.0: पशुपालकों से ज्यादा दूध खरीदेंगे राज्य, डेयरी मंत्रालय और NDDB की सलाह

श्वेत क्रांति 2.0 के तहत भारत सरकार और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) उत्तरी राज्यों में डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत करने और दूध की खरीद 15-20% तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह पहल पशुपालकों की आय बढ़ाने, महिलाओं को रोजगार देने और पर्यावरणीय स्थिरता को प्रोत्साहन देने पर केंद्रित है।

Published: 15:00pm, 01 May 2025

भारत में डेयरी सहकारी समितियां (डीसीएस) देश के लगभग सभी राज्यों में पशुपालकों से दूध की खरीद कर रही हैं। वर्तमान में ये समितियां मांग से 5% अधिक दूध खरीद रही हैं, लेकिन श्वेत क्रांति 2.0 के तहत इसे 15-20% तक बढ़ाने की योजना है। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा आयोजित एक वर्कशॉप में इस पर चर्चा हुई। इस वर्कशॉप में मंत्रालय की सचिव अलका उपाध्याय और एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तरी राज्यों में डीसीएस को सशक्त बनाना और दूध उत्पादन को बढ़ावा देना था।

दूध खरीद और पशुपालकों की आय में वृद्धि

वर्कशॉप में राज्यों को सलाह दी गई कि वे पशुपालकों से दूध की खरीद बढ़ाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों को उचित दाम मिले। सहकारिता और गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि देश में 23 राज्यस्तरीय मिल्क कोऑपरेटिव हैं, लेकिन श्वेत क्रांति 2.0 के तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक राज्यस्तरीय कोऑपरेटिव स्थापित करने का लक्ष्य है। साथ ही, 80% जिलों में डेयरी कोऑपरेटिव स्थापित करने की योजना है। यह पहल न केवल दूध उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। डेयरी सेक्टर में 72% महिलाएं कार्यरत हैं, जो इस क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को दर्शाता है।

श्वेत क्रांति 2.0 के प्रमुख लक्ष्य

उत्पादन में वृद्धि

श्वेत क्रांति 2.0 का मुख्य लक्ष्य डेयरी पशुओं की उत्पादकता बढ़ाना है। कृत्रिम गर्भाधान और जीनोमिक चयन जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले चारे और बेहतर पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से दूध की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार होगा।

तकनीकी एकीकरण

डेयरी फार्मिंग में डिजिटल नवाचारों को शामिल करना इस क्रांति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डेटा एनालिटिक्स, मोबाइल स्वास्थ्य निगरानी ऐप और एआई-संचालित कृषि प्रबंधन समाधान पशुपालकों के संचालन को आधुनिक बनाएंगे। ये तकनीकें दूध उत्पादन को और कुशल बनाएंगी।

पर्यावरणीय स्थिरता

श्वेत क्रांति 2.0 में पर्यावरणीय स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया है। जलवायु परिवर्तन डेयरी क्षेत्र के लिए एक बड़ा खतरा है। मीथेन उत्सर्जन और पानी की खपत को कम करने के लिए जैविक चारा उत्पादन और वेस्ट मैनेजमेंट प्रणालियों में सुधार पर जोर है। ये कदम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पशुपालकों के लिए नई आय के अवसर भी खोलेंगे।

डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार

श्वेत क्रांति 2.0 के तहत अगले पांच वर्षों में 75,000 नई डीसीएस स्थापित करने और 46,422 मौजूदा समितियों को मजबूत करने की योजना है। इन समितियों को नए दूध मार्गों या मौजूदा मार्गों के विस्तार से बाजार से जोड़ा जाएगा। एनडीडीबी इस पहल का समन्वय करेगा, जिससे दूध की खरीद 2023-24 के 660 लाख लीटर से बढ़कर 2028-29 तक 1,000 लाख लीटर हो सके।

महिला सशक्तिकरण और रोजगार

डेयरी क्षेत्र में महिलाएं दूध दुहने, चारा खिलाने और पशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। श्वेत क्रांति 2.0 के तहत महिला-नेतृत्व वाली डीसीएस को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं को संगठित क्षेत्र में शामिल किया जा सके। यह पहल ग्रामीण सशक्तिकरण और आर्थिक विकास को गति देगी।

YuvaSahakar Desk

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