स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर वर्ल्ड्स टॉप 2% साइंटिस्ट्स की 2026 की सूची में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु ने भारतीय संस्थानों में पहला स्थान हासिल किया है। संस्थान के 139 शोधकर्ताओं को करियर-लॉन्ग श्रेणी में जगह मिली है। यह उपलब्धि भारतीय वैज्ञानिकों की वैश्विक पहचान और शोध के क्षेत्र में उनके बढ़ते योगदान को दर्शाती है।
सूची में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली 114 शोधकर्ताओं के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर के 97, आईआईटी मद्रास के 81 और आईआईटी बॉम्बे के 73 शोधकर्ताओं को स्थान मिला है।
इस अंतरराष्ट्रीय सूची में भारत के कुल 1,185 संस्थानों से जुड़े 3,898 शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है। यह संख्या वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारतीय शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण भागीदारी को रेखांकित करती है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा तैयार और एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित यह सूची वैज्ञानिकों के शोध कार्यों के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए मानकीकृत साइटेशन संकेतकों का उपयोग करती है। इसमें वैज्ञानिक शोधपत्रों को मिलने वाले संदर्भों और अन्य शोध संबंधी मानकों के आधार पर शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक योगदान का आकलन किया जाता है।
करियर-लॉन्ग श्रेणी में वैज्ञानिकों के पूरे शोध करियर के दौरान किए गए कार्यों के प्रभाव को ध्यान में रखा जाता है। इससे लंबे समय तक वैज्ञानिक अनुसंधान में योगदान देने वाले शोधकर्ताओं की पहचान करने में मदद मिलती है। हालांकि, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि सूची में किसी संस्थान से जुड़े शोधकर्ताओं की संख्या उसके कुल शोध उत्पादन या संस्थागत गुणवत्ता का प्रत्यक्ष मापदंड नहीं है।
आईआईएससी बेंगलुरु और प्रमुख आईआईटी संस्थानों की मजबूत उपस्थिति भारत में उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में मौजूद शोध क्षमताओं को सामने लाती है।
विशेषज्ञों के लिए यह सूची वैज्ञानिक शोध के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और भारतीय संस्थानों से जुड़े शोधकर्ताओं के योगदान को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।


