एम्सतलवीन (नीदरलैंड), 19 अगस्त, 2026
भारत की मिजोरम में आईजोल से करीब 80 किलोमीटर दूर कोलासिब से आने वाली 26 वर्षीय बेहतर स्ट्राइकर ललरेमसियामी हमर जोट के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। ललेरमसियामी ने खुद बेहतरीन मैदानी गोल किया, पेनल्टी कॉर्नर बनाने के साथ साथी खिलाड़ियों को गोल करने में मदद कर भारत को यहां महिला हॉकी विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका पर 6-1 की बड़ी जीत दिलाने में अहम योगदान किया। ललरेमसियामी को मंगलवार को 2025 के अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजे जाने की घोषणा की गई। हॉकी में ललरेमसियामी महिला और पुरुष टीम के राजकुमार पाल को 2025 का अर्जुन पुरस्कार दिया जाएगा। ललरेमसियामी ने भारत को 2020 में टोक्यो ओलंपिक में चौथा, एशियाई खेलों में 2018 में रजत 2022 के एशियाई खेलों में कांसा, 2023 और 2024 की एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी ,2017 में एशिया कप और 2022 औार 2026में एफआईएच नेशंस कप जिताने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही भारत के लिए कई विश्व कप खेली चुकी ललरेमसियामी देश के उत्तर पूर्व में मिजोरम से आती है, जहां हॉकी बहुत कम खेली जाती है। मिजोरम से फुटबॉलर ज्यादा आते हैं। ललरेमसियामी मिजोरम की अर्जुन अवॉर्ड से नवाजी जाने वाली पहली खिलाड़ी हैं।
ललरेमसियामी ने कहा, ‘हमने बतौर टीम 1-2 की अपनी हॉकी यानी एक दूसरे के लिए गेंद आगे बढ़ा कर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले। इशिका चौधरी के माथे पर हल्का कट था। मैं उम्मीद करती हूं इशिका चौधरी फिट रहेंगी और इंग्लैंड के खिलाफ अहम मैच में खेलने उतरेंगी। हम बेशक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बड़े अंतर से जीते लेकिन जैसा की हमारे चीफ कोच शुएर्ड मराइन ने कहा है कि हम और बेहतर कर सकते थे। हमारी कोशिश इंग्लैंड के खिलाफ बृह्स्पतिवार के अहम मैच में और बेहतर करने की होगी। हम इंग्लैंड के खिलाफ उसके खेल की बजाय अपनी ताकत पर भरोसा कर खेलेंगे। हम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच की समीक्षा कर अब इंग्लैंड के खिलाफ कहां और बेहतर कर सकते थे उस पर ध्यान देंगे। मंगलवार को मुझे अर्जुन अवॉर्ड से नवाजे जाने की जब से घोषणा की गई ग्रुप पर, भारतीय हॉकी टीम की सभी साथी और परिवार सहित हर कोई बधाई दे रहा है। अर्जुन अवार्ड से नवाजे जाने की घोषणा किए जाने पर मैं बहुत गर्व महसूस कर रहीं हूं।अर्जुन अवॉर्ड मुझे भारतीय टीम के लिए और बेहतर हॉकी खेलने को प्रेरित करेगा। मैंने जब अपनी मम्मी को बताया कि मुझे अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा जाएगा तो वह फूली नहीं समाई। जब परिवार और मिजोरम में लोगों ने सुना कि मुझे अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा जाएगा तो पहले तो परिवार सहित किसी को इस पर यकीन ही नहीं हुआ। मैं मिजोरम से आती हूं जहां हॉकी बहुत लोकप्रिय नहीं है। मेरे इस हॉकी यात्रा में बहुत लोगों का योगदान है, खासतौर पर मेरे स्वर्गीय फौजी और किसान पिता ललथानसांगा जोट और मेरी मां का। मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरी इस हॉकी यात्रा में ओलंपियन रानी रामपाल का मार्गदर्शन मिला। रानी रामपाल मेरी मेंटोर रही और जब तक वह साथ खेली मेरा हर मोड़ मार्गदर्शन हूं और मैं इस मौके पर उनका भी आभार जताना चाहूंगी।’


