मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने सुझाव दिया है कि देशभर में एक ही दिन परीक्षा कराने के बजाय इसे अलग-अलग राज्यों में कई चरणों में आयोजित किया जाए। समिति का मानना है कि इससे परीक्षा संचालन का दबाव कम होगा और गड़बड़ियों की आशंका भी घटेगी।
कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की बैठक में शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अधिकारियों ने परीक्षा सुधारों पर प्रस्तुति दी। बैठक में NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन भी शामिल हुए।
समिति के कई सदस्यों ने कहा कि UPSC की कुछ परीक्षाओं की तरह NEET-UG भी चरणबद्ध तरीके से कराई जा सकती है। हालांकि NTA ने स्पष्ट किया कि इस पर अंतिम निर्णय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को लेना होगा, क्योंकि NEET का नोडल मंत्रालय वही है।
बैठक में MBBS, AYUSH और नर्सिंग कोर्स के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं कराने का सुझाव भी दिया गया, ताकि अभ्यर्थियों की संख्या कम हो सके। इस पर NTA ने कहा कि फिलहाल इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश NEET स्कोर के आधार पर होता है, इसलिए अलग परीक्षा कराना व्यावहारिक नहीं होगा।
समिति ने NTA को कानूनी दर्जा देने की भी सिफारिश की। सदस्यों का कहना था कि इतनी बड़ी परीक्षाओं के लिए एजेंसी को अधिक अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। फिलहाल NTA सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत काम करती है।
समिति ने 21 जून को हुई री-एग्जाम की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना की। परीक्षा के दौरान टेलीग्राम पर अस्थायी रोक, वॉट्सऐप चैनलों की निगरानी और कड़ी सर्विलांस व्यवस्था लागू की गई थी। वहीं, अगले साल से CBT मोड लागू करने के प्रस्ताव पर सदस्यों ने ग्रामीण और वंचित छात्रों की परेशानियों को ध्यान में रखने की सलाह दी।


