अमेरिका की एक ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ को गलत और कानून के दायरे से बाहर माना है। कोर्ट के अनुसार, सरकार के पास यह टैरिफ लगाने का पर्याप्त कानूनी अधिकार नहीं था, इसलिए इसे अवैध घोषित किया गया है। अदालत का यह फैसला फिलहाल केवल उन्हीं पक्षों पर लागू होगा जिन्होंने ट्रंप सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी। जजों ने आदेश दिया है कि संबंधित पक्ष पांच दिनों के भीतर निर्देशों का पालन करें।
जज मार्क ए. बार्नेट और क्लेयर आर. केली ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में असफल रहा कि टैरिफ लगाने के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी की गई थीं। उल्लेखनीय है कि यह टैरिफ फरवरी में लगाया गया था। इससे पहले भी इसी तरह की टैरिफ व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किया जा चुका है। यह नया प्रावधान धारा 122 के तहत लागू किया गया था, जो 150 दिनों के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक अस्थायी आयात शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
हालांकि यह फैसला अभी शुरुआती चरण में है और इस पर अपील की जा सकती है, इसलिए यह तुरंत पूरे देश में लागू नहीं हुआ है।
अगर यह 10% टैरिफ आगे जाकर समाप्त होता है या कमजोर पड़ता है, तो भारत के लिए इसके सकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगने वाला शुल्क घटने से वे सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। इससे कपड़ा, दवाइयाँ, इंजीनियरिंग सामान और रत्न-आभूषण जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अवसर बढ़ सकते हैं और निर्यात में वृद्धि हो सकती है। साथ ही, अमेरिकी कंपनियां भी भारत से अधिक आयात करने पर विचार कर सकती हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग मजबूत होगा।
इस फैसले के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में राहत की संभावना बढ़ गई है। यदि टैरिफ पूरी तरह हटता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम होगा और व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने में आसानी हो सकती है। हालांकि, यह मामला अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और अपील प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन शुरुआती संकेत भारत के लिए सकारात्मक माने जा रहे हैं।


