भारत सरकार के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने आंध्र प्रदेश Andhra Pradesh के रायलसीमा और प्रकाशम क्षेत्रों के लिए 5.11 लाख करोड़ रुपये की व्यापक ऋण योजना (Credit Plan) लागू की है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने, किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के समावेश को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर विशेष बल
इस योजना की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुल बजट का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए आवंटित किया गया है। कुल 5.11 लाख करोड़ रुपये में से 2.55 लाख करोड़ रुपये कृषि क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण पर व्यय किए जाएंगे। इसमें से 1.66 लाख करोड़ रुपये विशेष रूप से ‘फसल ऋण’ (Crop Loan) के लिए रखे गए हैं, जिससे किसानों को बुवाई के समय धन की कमी का सामना न करना पड़े। इसके अतिरिक्त, खेती को आधुनिक बनाने के लिए कृषि मशीनरी हेतु 8,265 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पशुपालन और मत्स्य पालन को नई ऊर्जा
ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए योजना में पशुपालन और मत्स्य पालन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पशुपालन क्षेत्र के लिए 34,972 करोड़ रुपये और मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए 21,098 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस फंडिंग का उद्देश्य डेयरी और नीली क्रांति (Blue Revolution) के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करना है।
सहकारी समितियों का डिजिटल परिवर्तन
सरकार का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था के बिना योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुँच सकता। इसी क्रम में, आंध्र प्रदेश की लगभग 18,194 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के सहयोग से इन समितियों के कंप्यूटरीकरण से ऋण वितरण, बीज और खाद की आपूर्ति में पारदर्शिता आएगी। डिजिटल होने से किसानों को अब ऋण के लिए हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि कुछ ही मिनटों में पात्रता के आधार पर लोन की सुविधा मिल सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, रायलसीमा जैसे सूखे की मार झेलने वाले क्षेत्रों के लिए यह योजना ‘संजीवनी’ साबित होगी। आधुनिक कृषि उपकरणों और आसान बैंकिंग सुविधाओं के माध्यम से खेती की लागत कम होगी और उत्पादकता में वृद्धि होगी। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रुकेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह योजना देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम है।


