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यूपी में दुग्ध क्रांति: 40% की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ बना देश का नंबर-1 दुग्ध उत्पादक राज्य

डेयरी क्षेत्र में इस प्रकार की प्रगति ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों की आय को भी मजबूत कर रही है। विशेष रूप से महिलाओं को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

Published: 15:00pm, 10 Apr 2026

उत्तर प्रदेश ने डेयरी और पशुपालन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक राज्य का गौरव हासिल किया है। राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही यूपी ने दुग्ध उत्पादन के मामले में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे अग्रणी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

रिकॉर्ड उत्पादन और राष्ट्रीय हिस्सेदारी

आधिकारिक विवरण के अनुसार, वर्ष 2016-17 में प्रदेश का दुग्ध उत्पादन मात्र 277 लाख मीट्रिक टन था, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में वर्ष 2024-25 तक बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है। वर्तमान में भारत के कुल दुग्ध उत्पादन में पांच प्रमुख राज्यों की 54% हिस्सेदारी है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान बढ़कर 16% हो गया है। पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने इस सफलता का श्रेय योजनाबद्ध विकास, बेहतर बुनियादी ढांचे और डेयरी क्षेत्र में किए गए तकनीकी सुधारों को दिया है।

महिला सशक्तिकरण से मिली ‘सफेद क्रांति’ को मजबूती

उत्तर प्रदेश की इस दुग्ध क्रांति का सबसे सशक्त पहलू ग्रामीण महिलाओं की सहभागिता है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लाखों महिलाएं डेयरी व्यवसाय से जुड़कर न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ भी बन रही हैं।

प्रदेश के 31 जिलों में महिला दुग्ध उत्पादक समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। ये समूह प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक इन महिला समूहों और कंपनियों का कुल कारोबार करीब 5000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

प्रमुख उत्पादक कंपनियां और व्यापक नेटवर्क

प्रदेश में पाँच प्रमुख महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियां ग्रामीण महिलाओं को बाजार से जोड़ने का कार्य कर रही हैं, जिनसे 4 लाख महिला किसान सीधे तौर पर जुड़ी हैं:

  • बलिनी एमपीसीएल (बुंदेलखंड)

  • काली एमपीसीएल (पूर्वांचल)

  • सामर्थ्य एमपीसीएल (अवध)

  • श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल (गोरखपुर)

  • सृजन एमपीसीएल (तराई क्षेत्र)

सरकार का यह ठोस कदम न केवल किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा कर रहा है, बल्कि ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को भी धरातल पर चरितार्थ कर रहा है। डेयरी सेक्टर में आया यह उछाल भविष्य में उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी हब बनाने की दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित होगा।

YuvaSahakar Desk

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