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जब घर में उदासी हावी हो जाती है तो तब मैं अपने हॉकी परिवार का सहारा लेती हूं : ब्यूटी

अंतर्राष्ट्रीय हॉकी के दबाव और घर पर बीमार मां के चलते परिवार में संतुलन कतई आसान नहीं

भारत की 22 बरस की तेज तर्रार स्ट्राइकर ब्यूटी डुंगडुंग के चोट के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम में वापसी की कहानी उनके जीवन की कहानी है। फिलहाल  ब्यूटी बेंगलुरू में भारत की महिला हॉकी टीम के राष्ट्रीय शिविर में पसीना बहा रही हैं। चोट के बाद ब्यूटी डुंगडुंग का हॉकी मैदान पर वापस लौटना उनकी जिंदगी की अब तक तक का सबसे बड़ा संघर्ष रहा है।

घुटने की चोट के चलते ब्यूटी महीनों मैदान से बाहर रही और इस दौरान उन्होंने अपने पिता को भी खो दिया। तब ब्यूटी के जेहन में यह विचार भी आया कि क्या वह कभी फिर वापस मैदान पर लौट कर हॉकी खेल भी पाएगी या नही। ब्यूटी की कहानी भारत के लिए हॉकी खेलने के साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाने की प्रेरक गाथा है।

अपनी चोट से ज्यादा मेरे लिए अपने पिता को खोना और दुखद था। ब्यूटी के पिता उनका सबसे बड़ा संबल थे झारखंड के एक छोटे गांव में में पली बढ़ी ब्यूटी को पैसे की दिक्कत हमेशा रही। जब ब्यूटी मात्र पांच बरस की थी तो उनके पिता ने बांस से पहली हॉकी स्टिक बना कर उन्हें दी क्योंकि वह सही हॉकी स्टिक खरीद कर नहीं दे सकते थे। ब्यूटी के हॉकी खेलने के सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता को दिहाड़ी मजदूर के रूप में मजदूरी के लिए अन्य राज्य में जाकर मजबूरी भी करनी पड़ी। अब ब्यूटी ही अपने परिवार की सारी जिम्मेदारी उठाती हैं और यह सब उनकी इंडियन ऑयल की नौकरी के कारण ही मुमकिन हो पा रहा है। अब वह अपने भाई के परिवार और अपने भतीजे और भतीजी की पढ़ाई का खर्च भी ब्यूटी ही उठाती हैं। ब्यूटी अपनी याददाश्त को बनाए रखने के लिए जूझने वाली और आशिंक रूप से लकवागस्त  अपनी मां का भी ख्याल वही करती है।

ब्यूटी डुंगडुंग बताती हैं, ‘मुझे 2023 में घुटने की चोट से उबर कर भारतीय महिला टीम में वापसी करने में दो बरस लग गए। इस चोट के दौरान मैंने अपने पिता को भी खो दिया। तब मैं भारतीय हॉकी टीम के शिविर और घर आती जाती रही। एक साथ बहुत कुछ घट गया। तब मुझे खुद पर यह संदेह होने लगा कि क्या मेरी कभी भारतीय हॉकी टीम में वापसी हो भी पाएगी या नहीं। जब तक मेरे पापा थे तो मुझे उनका बहुत सहारा था। अब मुझे हर चीज खुद ही करनी पड़ती है। मेरी मां भी आशिंक रूप से लकवाग्रस्त है ही उनकी याददाश्त भी कमजोर हो रही है वह अपनी बात भूल जाती हैं। मुझे अपनी मां को बार बार बताना पड़ता है और अभी भी बस यही कहती हैं कि कम घर लौटोगी। मैं जब घर से बाहर होती हूं तो मैं अपनी मां की बाबत ही सोचती रहती हूं। अंतर्राष्ट्रीय हॉकी के दबाव और घर पर बीमार मां के चलते परिवार में संतुलन बनाना कतई आसान नहीं है। यदि मैं केवल घर की बाबत बहुत सोचूंगी तो मैं ही परेशानी में फंस जांउगी और इसीलिए मैं अपना पूरा अपने खेल पर लगा रही हूं। आर्थिक रूप से परिवार की मदद कर बहुत अच्छा लगता है। मैं घर और हॉकी में तालमेल बनाने  की कोशिश करती है। जब घर में उदासी हावी हो जाती है तो तब मैं अपने हॉकी परिवार का सहारा लेती हूं। मेरी टीम में मेरी साथी हैं और मैं उनके साथ अपनी बात साझा करती हूं, मैच से पहले भी यदि मैं निराश महसूस करती हं तो अपनी टीम की साथियों को यह बता देती हूं कि मैं बहुत अच्छा महसूस नहीं कर रही हूं कृपया मेरा हौसला बढ़ाए। ऐसे में टीम मेरी मदद करती है।’

ब्यूटी डुंगडुंग धीमे धीमे अपनी लय पा रही है और हाल ही में भारत के लिए महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी और महिला एचआईएल में खेली। अब ब्यूटी राष्ट्रीय शिविर में लौट आई है ब्यूटी अ एफआईएच हॉकी महिला विश्व कप2026 क्वॉलिफायर्स हैदराबाद, तेलंगना के लिए कड़ी मेहनत करने में जुटी है और डी के भीतर अपना आत्मविश्वास पाने में लगी है। ब्यूटी अब हॉकी खेलने वाली नई लड़की नहीं हैं। ब्यूटी  भी वह हॉकी स्टिक पकड़ती है, वह अपनी माँ की देखभाल, अपने परिवार के भविष्य और उस पिता की याद में खेलती है जिन्होंने उनके खेलने के लिए उन्हें बांस से पहली हॉकी स्टिक बना कर दी थी।

YuvaSahakar Desk