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उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक होगा पूरी तरह डिजिटल, NABARD देगा वित्तीय सहयोग

इस पहल के तहत प्रयास किया जा रहा है कि किसान बिना बैंक की शाखा में आए, मोबाइल एप या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने भूमि दस्तावेज डिजिटल रूप में अपलोड कर सकें और ऋण के लिए आवेदन कर सकें। यह व्यवस्था न केवल किसानों को सुविधा देगी, बल्कि आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाएगी और धोखाधड़ी की संभावनाओं को भी कम करेगी।

Published: 14:26pm, 07 Jan 2026

उत्तर प्रदेश में सहकारी बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड को पूरी तरह डिजिटलाइज्ड करने की तैयारी की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत बैंक की प्रदेशभर में स्थित लगभग चार सौ शाखाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए नाबार्ड द्वारा वित्तीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

योजना के अनुसार प्रत्येक शाखा में कंप्यूटर उपकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, फर्नीचर एवं अन्य डिजिटल संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। अनुमान है कि इस संपूर्ण प्रक्रिया पर लगभग आठ से नौ करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसमें 70 प्रतिशत वित्तीय सहयोग नाबार्ड तथा 30 प्रतिशत योगदान सहकारी बैंक का होगा। इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद अप्रैल 2026 से किसानों को ऋण एवं अन्य वित्तीय सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।

भूमि विकास बैंक का यह आधुनिक रूप अब कई राज्यों में सहकारी बैंकों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को तकनीक आधारित, पारदर्शी एवं त्वरित वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था के तहत लोन आवेदन, दस्तावेज जमा करना एवं उनकी निगरानी संपूर्ण रूप से डिजिटल माध्यम से की जाएगी।

सरकार का प्रयास है कि किसान बिना बैंक शाखा आए ही मोबाइल एप अथवा पोर्टल के माध्यम से अपने भूमि संबंधित दस्तावेज अपलोड कर सकें और ऋण के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकें। इससे किसानों को अनावश्यक चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी तथा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया भी त्वरित होगी। साथ ही भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण, पारदर्शिता में वृद्धि और धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित होगा।

YuvaSahakar Desk