गुजरात सरकार ने सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को अल्पकालिक कृषि ऋण पर 2 प्रतिशत ब्याज राहत देने के लिए 174.07 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की है। इस फैसले से राज्य के 10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि यह सहायता उन अल्पकालिक फसल ऋणों पर लागू होगी, जिन्हें सहकारी बैंकों ने अपने स्वयं के संसाधनों से 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2025 के बीच वितरित किया था। सरकारी सहायता के बाद पात्र किसानों को ये कृषि ऋण 7 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध हो सकेंगे।
यह ब्याज सहायता योजना 2009-10 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों की ऋण लागत कम करना और गुजरात की सहकारी कृषि ऋण व्यवस्था को मजबूत करना है। योजना लागू होने से पहले सहकारी बैंक ऐसे कृषि ऋणों पर सामान्यतः 10 से 13 प्रतिशत तक ब्याज वसूलते थे।
यह व्यवस्था विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो बीज, उर्वरक, कीटनाशक, मजदूरी और अन्य खेती संबंधी खर्चों के लिए संस्थागत ऋण पर निर्भर रहते हैं। कम ब्याज दर से किसानों पर वित्तीय बोझ घट सकता है और उन्हें समय पर कृषि ऋण मिलने में मदद मिल सकती है।
गुजरात में तीन स्तरीय सहकारी ऋण नेटवर्क कार्यरत है। इसमें एक राज्य सहकारी बैंक, 18 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और 10,900 से अधिक प्राथमिक कृषि ऋण समितियां यानी PACS शामिल हैं।
यह नेटवर्क राज्य के 10 लाख से अधिक किसानों को सेवाएं देता है। सरकार की ताजा सहायता से सस्ती कृषि ऋण सुविधा का दायरा बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।


