डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1,988 करोड़ के जमाा बीमा दावों का निपटारा किया। DICGC की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी राशि सहकारी बैंकों से संबंधित थी, जो परिसमापन, विलय या All-Inclusive Directions (AID) के तहत थे।
कुल दावों में ₹1,460 करोड़ उन बैंकों से जुड़े थे जिन्हें AID के तहत रखा गया था। यह राशि DICGC Act, 1961 की धारा 18A के तहत जमाकर्ताओं को अंतरिम भुगतान के रूप में दी गई। शेष ₹528 करोड़ परिसमाप्त और विलय किए गए सहकारी बैंकों से संबंधित थे। इस दौरान किसी वाणिज्यिक बैंक से कोई दावा नहीं आया सहकारी बैंकों से प्राप्त बीमा प्रीमियम भी 6.7 प्रतिशत बढ़कर FY26 में ₹1,507 करोड़* हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹1,412 करोड़ था।
31 मार्च 2026 तक DICGC के बीमा कवरेज में कुल 1,950 बैंक थे, जिनमें 1,826 सहकारी बैंक शामिल थे। वर्ष के दौरान 17 अर्बन कोऑपरेटिव बैंक डीरजिस्टर हुए, जिनमें मुख्य कारण विलय और समेकन रहा। एक प्रमुख बदलाव के रूप में Risk-Based Premium Framework 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ। इसके तहत बैंकों के जोखिम प्रोफाइल के आधार पर प्रीमियम तय होगा। सहकारी बैंकों के लिए प्रीमियम दरें जोखिम श्रेणी A, B, C और D के अनुसार क्रमशः 8, 10, 11 और 12 पैसे प्रति ₹100 जमा रखी गई हैं। यह व्यवस्था बेहतर जोखिम प्रबंधन और मजबूत वित्तीय अनुशासन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।


