केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गुजरात के आणंद में ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। समारोह में विश्वविद्यालय के पहले बैच के 302 विद्यार्थियों को स्नातक और दो विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में स्थापित यह विश्वविद्यालय सहकारिता क्षेत्र के पेशेवर और अकादमिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। विश्वविद्यालय भविष्य के सहकारी नेतृत्वकर्ताओं, शोधकर्ताओं और पेशेवर प्रबंधकों को तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए संकल्प और वास्तविक कार्यक्षेत्र में नई यात्रा की शुरुआत है। विद्यार्थियों को आधुनिक प्रबंधन, तकनीक और नवाचार के माध्यम से भारत के सहकारी आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना होगा।
मोहोल के अनुसार देश में 8.5 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं, जिनसे 32 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हैं। आने वाले वर्षों में सहकारिता क्षेत्र को 17 लाख से अधिक प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय इस आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने युवाओं से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नवाचार का इस्तेमाल कर सहकारी संस्थाओं तथा कृषि व्यवसायों को अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने का आह्वान किया। सरकार ने अगले पांच वर्षों में दो लाख बहुद्देशीय पैक्स स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से 35 हजार से अधिक समितियां काम शुरू कर चुकी हैं।
मोहोल ने कहा कि सहकारिता अब डेयरी और बैंकिंग तक सीमित नहीं है। इसका विस्तार जैविक खेती, बीज उत्पादन, पर्यटन, भंडारण, बीमा, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल सेवाओं तक हो रहा है।


