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बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्रों में बढ़ते तनाव और असफलता के डर को कम करने के लिए बिहार शिक्षा विभाग कई अहम बदलावों पर विचार कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में अपेक्षित अंक हासिल नहीं कर पाने वाले छात्रों की मार्कशीट पर ‘फेल’ शब्द लिखने के बजाय सकारात्मक और प्रोत्साहित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत ऐसे छात्रों के प्रमाणपत्र या मार्कशीट पर ‘कौशल के लिए पात्र’ यानी स्किल ट्रेनिंग के योग्य लिखा जा सकता है। इसके बाद छात्रों की रुचि और क्षमता के आधार पर उन्हें कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की योजना है, ताकि कम अंक आने के कारण उनका आत्मविश्वास प्रभावित न हो और उन्हें भविष्य के लिए दूसरा अवसर मिल सके।
शिक्षा मंत्री की ओर से साझा विचार के मुताबिक परीक्षा में उम्मीद के अनुरूप अंक हासिल नहीं कर पाना किसी छात्र की प्रतिभा या क्षमता का अंतिम पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। परीक्षा प्रमाणपत्र में इस्तेमाल होने वाली भाषा भी ऐसी होनी चाहिए, जो छात्र का हौसला बढ़ाए और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे।
स्कूली पढ़ाई के तरीके में भी बदलाव की तैयारी है। योजना के अनुसार शनिवार को स्कूलों में केवल करीब साढ़े तीन घंटे की पढ़ाई कराई जा सकती है। शनिवार को ‘नो-बैग डे’ के रूप में भी विकसित करने की योजना है।
नो-बैग डे पर नियमित किताबों की पढ़ाई के बजाय खेलकूद, कला, संगीत, विज्ञान गतिविधियों और अन्य कौशल आधारित कार्यक्रमों पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार नई चीजें सीखने का अवसर देना और पढ़ाई को केवल परीक्षा तथा अंकों तक सीमित न रखना है।


