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12.30 लाख किसानों को मिला लाभ, महिला किसानों की भी बढ़ी भागीदारी

पानी की कमी भारतीय खेती की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है, देश के उपलब्ध जल संसाधनों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कृषि सिंचाई में इस्तेमाल होता है, जबकि शुद्ध बोए गए क्षेत्र का करीब आधा हिस्सा ही सिंचाई सुविधा के दायरे में है

Micro-Irrigation Boosts Water Savings, Crop Yields and Farmer Incomes Across India


Published: 13:33pm, 31 Aug 2026

पानी की कमी भारतीय खेती की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। देश के उपलब्ध जल संसाधनों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कृषि सिंचाई में इस्तेमाल होता है, जबकि शुद्ध बोए गए क्षेत्र का करीब आधा हिस्सा ही सिंचाई सुविधा के दायरे में है। ऐसे में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (PDMC) योजना पानी की हर बूंद का बेहतर इस्तेमाल कर खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।

जुलाई 2026 तक योजना के तहत 115 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो सिंचाई प्रणालियों से जोड़ा जा चुका है। यह देश के शुद्ध बुवाई क्षेत्र का करीब 8.11 प्रतिशत है। केवल 2025-26 में योजना से 12.30 लाख किसान लाभान्वित हुए, जिनमें लगभग 20 प्रतिशत महिलाएं थीं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान माइक्रो सिंचाई कवरेज में प्रमुख राज्यों में रहे।

किसानों के लिए आर्थिक मदद भी योजना की बड़ी ताकत है। छोटे और सीमांत किसानों को माइक्रो सिंचाई प्रणाली लगाने की लागत का 55 प्रतिशत, जबकि अन्य किसानों को 45 प्रतिशत तक सहायता मिलती है। पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार ने इसके लिए ₹8,123.24 करोड़ जारी किए हैं।

योजना के असर के आंकड़े भी उत्साहजनक हैं। अध्ययनों में जल उपयोग दक्षता में 30 से 70 प्रतिशत तक सुधार और किसानों की आय में 10 से 69 प्रतिशत तक लाभ दर्ज किया गया है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार माइक्रो सिंचाई से पानी की 20 से 48 प्रतिशत, ऊर्जा की 10 से 17 प्रतिशत और उर्वरक की 11 से 19 प्रतिशत तक बचत हुई, जबकि फसल उपज में 20 से 38 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। यानी ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ केवल सिंचाई योजना नहीं, बल्कि कम पानी में ज्यादा उत्पादन और बेहतर किसान आय की दिशा में बड़ा बदलाव बन रही है।

Jitendra