जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव और उसके बाद पुलिस कार्रवाई ने युवाओं के व्यवहार, सोशल मीडिया के प्रभाव और कानून की समझ को लेकर नई बहस छेड़ दी थी। इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली पुलिस अब स्कूलों में ‘जेनजी पाठशाला’ शुरू करने जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, जागरूक और डिजिटल रूप से सतर्क नागरिक बनाना है।
इस अभियान की शुरुआत अगले सप्ताह पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित विद्या बाल भवन स्कूल से होगी। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के साथ पुलिस अधिकारी सीधे संवाद करेंगे। छात्रों को बताया जाएगा कि किसी वीडियो, संदेश या सोशल मीडिया पोस्ट को बिना सत्यापन के साझा करने से किस तरह गलत सूचना, अफवाह या कानूनी परेशानी पैदा हो सकती है।
शुरुआत पूर्वी दिल्ली से होगी, लेकिन बाद में इस पहल को राजधानी के अन्य जिलों के स्कूलों तक भी विस्तार देने की योजना है। कार्यक्रम में डीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारी छात्रों से ट्रैफिक नियम, साइबर अपराध, सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल, अनुशासन और कानून के पालन जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।
‘जेनजी पाठशाला’ को पारंपरिक लेक्चर की तरह नहीं रखा जाएगा। इसमें सवाल-जवाब, वीडियो प्रेजेंटेशन और वास्तविक घटनाओं के उदाहरणों के जरिए छात्रों को समझाया जाएगा कि छोटी लापरवाही भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
कार्यक्रम में एआई की मदद से तैयार शिक्षाप्रद कहानियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इनके जरिए साइबर फ्रॉड, अफवाह, फर्जी सूचना और कानून तोड़ने के परिणामों को आसान भाषा में समझाया जाएगा।
सत्र के अंत में छात्रों से फीडबैक भी लिया जाएगा, ताकि यह समझा जा सके कि किन विषयों पर उनकी समझ बेहतर हुई और किन मुद्दों पर आगे और जागरूकता की जरूरत है


