भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी वैश्विक मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना के सभी छह स्तंभों की अधिसूचना जारी कर दी है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, अनुसंधान और प्रतिभा विकास तक पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
वैष्णव के मुताबिक भारत ने 10 वर्षों में 85 हजार सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य सिर्फ चार वर्षों में हासिल कर लिया है। अब एक लाख और इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का नया लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के करीब 10 प्रतिशत बाजार का हिस्सा भारत में होने की उम्मीद है।
सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभों में डिजाइन, मशीन और सामग्री, नए फैब की स्थापना, ATMP और OSAT उद्योग को मजबूती, अनुसंधान एवं विकास तथा टैलेंट डेवलपमेंट शामिल हैं।
सरकार के अनुसार टियर-II और टियर-III शहरों के छात्रों ने 250 से अधिक सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन किए हैं। यह देश के छोटे शहरों में तेजी से उभर रही तकनीकी प्रतिभा को दर्शाता है।
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से 50 हजार से 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। वैष्णव ने बताया कि कई परियोजनाओं को 90 से 200 दिनों के भीतर मंजूरी दी गई है, जबकि एक परियोजना में भूमिपूजन के महज 13 महीने बाद व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया।
योजना के तहत परियोजनाओं की अवधि छह वर्ष तक हो सकती है और शुरुआती तीन वर्षों तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन योजना की नोडल एजेंसी होगी। सरकार तीन साल बाद इसकी मध्यावधि समीक्षा भी करेगी।


