केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध स्कूलों में डमी एडमिशन और अनिवार्य उपस्थिति नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए औचक निरीक्षण कराने की सिफारिश की है। आयोग ने यह कदम उस शिकायत के संदर्भ में उठाया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना ही बोर्ड परीक्षा में शामिल होकर प्रमाणपत्र हासिल कर रहे हैं।
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलांगी ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25(5) का उपयोग करते हुए CBSE को संबद्ध स्कूलों की निगरानी और नियमों के अनुपालन की जांच मजबूत करने की सलाह दी।
मामला भोपाल के निजी मिशनरी स्कूलों में उपस्थिति संबंधी नियमों, विषय चयन और निर्धारित पाठ्यपुस्तकों से जुड़ी जानकारी मांगने वाले एक RTI आवेदन से सामने आया। आवेदक का कहना था कि उसका उद्देश्य कथित डमी एडमिशन की व्यवस्था को उजागर करना है।
शुरुआत में CBSE के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने आवेदन शुल्क के लिए जमा किए गए इंडियन पोस्टल ऑर्डर में तकनीकी त्रुटि बताते हुए आवेदन वापस कर दिया था। सुनवाई के दौरान CIC ने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर आवेदन अस्वीकार करना RTI कानून की भावना के अनुरूप नहीं है और आवेदक को बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
बाद में CBSE ने बिंदुवार जवाब प्रस्तुत किया। बोर्ड ने अपने अफिलिएशन बायलॉज, 2018 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नियमित कक्षाओं में उपस्थित न रहने या न्यूनतम उपस्थिति पूरी न करने वाले विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के लिए प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
CIC ने सुझाव दिया कि इन नियमों के प्रभावी पालन और डमी एडमिशन जैसी शिकायतों पर रोक लगाने के लिए CBSE समय-समय पर संबद्ध स्कूलों में बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण करे।


