तमिलनाडु सरकार ऐसी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत राज्य के उन छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस और विदेश में रहने का खर्च उठाया जाएगा, जिन्हें स्टैनफोर्ड, हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसी दुनिया की शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है। बदले में लाभार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद तीन साल तक तमिलनाडु के विकास में योगदान देना होगा।
प्रस्तावित ‘रिस्पेक्ट फॉर नॉलेज’ योजना के तहत छात्र तीन तरीकों से यह जिम्मेदारी पूरी कर सकेंगे—राज्य सरकार के लिए नीति सलाहकार या कंसल्टेंट के रूप में काम करके, तमिलनाडु के उच्च शिक्षण संस्थानों में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में सेवाएं देकर, या राज्य में उद्यम शुरू कर निवेश करके। इसका उद्देश्य विदेश में हासिल ज्ञान और वैश्विक अनुभव को राज्य की नीतियों, उच्च शिक्षा और उद्योग से जोड़ना है।
अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, तमिलनाडु से हर साल लगभग 35,000 से 40,000 छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। इनमें करीब 5 से 6 प्रतिशत छात्र विश्व की शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं। सरकार इस योजना को ‘ब्रेन ड्रेन’ के जवाब के रूप में भी देख रही है, ताकि विदेश शिक्षा पर किया गया सार्वजनिक निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था और संस्थानों को प्रत्यक्ष लाभ दे सके।
हालांकि योजना अभी अंतिम रूप में नहीं है। पात्रता, शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों की पहचान का तरीका, चयन प्रक्रिया, तीन साल की सेवा की शर्त और नियमों का पालन न होने की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम जारी है। उच्च शिक्षा विभाग विदेश में पढ़ रहे छात्रों, वैश्विक विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों और शिक्षाविदों से परामर्श करने की तैयारी में है, ताकि योजना व्यावहारिक और छात्रों के लिए स्वीकार्य बन सके।


