राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मेडिकल एजुकेशन के मानकों को बनाए रखने से जुड़े 2023 के नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। यह निर्णय 14 अक्टूबर की अधिसूचना के माध्यम से घोषित किया गया, जिसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। हालांकि, मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को वार्षिक रिपोर्ट (Annual Disclosure Report-ADR) दाखिल करना पहले की तरह जारी रखना होगा।
2023 के नियम सितंबर 2023 में लागू हुए थे। इन्हें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की विभिन्न धाराओं के तहत अधिसूचित किया गया था। नई अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि नियमों की वापसी का असर उन मंजूरियों, नवीनीकरण, आदेशों, फैसलों और निर्देशों पर नहीं पड़ेगा, जो इन नियमों के लागू रहने के दौरान जारी किए गए थे।
इसी तरह, पहले से प्राप्त अधिकार, दायित्व और कानूनी जिम्मेदारियां भी समाप्त नहीं होंगी। इसका अर्थ है कि पुराने नियामक निर्णय स्वतः निरस्त नहीं माने जाएंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेडिकल संस्थानों के लिए ADR दाखिल करने की बाध्यता बनी रहेगी। NMC ने स्पष्ट किया है कि यह आवश्यकता राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की संबंधित धाराओं और समय-समय पर लागू नियमों के अनुसार जारी रहेगी।
लंबित आवेदन, अपील, जांच और अन्य कार्यवाहियों को भी संक्रमणकालीन प्रावधानों के अनुसार निपटाया जा सकता है। जहां आवश्यक होगा, पुराने 2023 के नियम लागू रह सकते हैं, जबकि नियम वापस लिए जाने के बाद शुरू होने वाले नए मामलों पर मौजूदा NMC अधिनियम और उस समय लागू नियम लागू होंगे।
इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि मेडिकल कॉलेजों की नियामक जिम्मेदारियां खत्म हो गई हैं। संस्थानों को अभी भी वैधानिक रिपोर्टिंग, अनुपालन और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।


