युवा सहकार के वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक राजा ने सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर से खास बातचीत की। सहकार भारती देश की प्रमुख सहकारी संगठनों में से एक है, जिसका उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना, आर्थिक उत्थान को बढ़ावा देना और समाज को सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के मार्ग पर ले जाना है। आज हम इन्हीं मुद्दों पर आपसे चर्चा करेंगे।
केंद्र सरकार ने देश में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। लेकिन जिन राज्यों में सहकारिता पहले से मजबूत नहीं है, वहां इन पहलों का असर अभी उतना दिखाई नहीं दे रहा है। आपको क्या लगता है, इन्हें जमीनी स्तर तक पहुंचने में कितना समय लगेगा?
देखिए, सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि केंद्र सरकार और विशेष रूप से माननीय अमित शाह जी के प्रयास बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इन पहलों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए पूरे देश में सहकारिता का अनुकूल वातावरण बनाना जरूरी है। आपने सही कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में सहकारिता पहले से ही मजबूत है। लेकिन उत्तर भारत सहित कई राज्यों में सहकारिता उतनी विकसित नहीं है। अगर सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से गांव और प्राथमिक सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाया जाए तो वहां भी सहकारिता का विस्तार हो सकता है।
मैं हाल ही में उत्तर प्रदेश के चार जिलों में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) का दौरा करके आया हूं। वहां तीन प्रमुख चुनौतियां देखने को मिलीं- पहली, प्रशिक्षण का अभाव; दूसरी, सरकारी योजनाओं की जानकारी का नीचे तक न पहुंच पाना और तीसरी सहकारिता के प्रति विश्वास की कमी। इन तीनों क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है।
सहकारिता में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए क्या किया जाना चाहिए? इस विषय में सहकार भारती का क्या दृष्टिकोण है?
आने वाले समय में युवाओं की भूमिका सहकारिता में बहुत महत्वपूर्ण होगी। हालांकि सहकारिता ऐसा क्षेत्र है जिसमें आर्थिक लाभ तुरंत नहीं मिलता। सहकारी संस्थाएं धीरे-धीरे विकसित होती हैं और समय के साथ ही आर्थिक लाभ देती हैं। इसलिए युवाओं को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम रोजगार हो सकता है। सहकारिता के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। सहकार भारती कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर युवाओं को सहकारिता से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की है, जिसके माध्यम से युवाओं तक सहकारिता की शिक्षा और विचार पहुंचाने का प्रयास हो रहा है।
हाल ही में एक नई पहल ‘भारत टैक्सी’ के रूप में सामने आई है, जो सहकारी मॉडल पर आधारित है। इसका पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली और राजकोट में शुरू हुआ है और हजारों युवाओं ने इसमें सदस्यता ली है। ऐसे नए आयामों के माध्यम से सहकारिता में युवाओं की भागीदारी निश्चित रूप से बढ़ेगी।
सहकारिता क्षेत्र में भ्रष्टाचार की समस्या को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
सच कहें तो ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां भ्रष्टाचार बिल्कुल न हो। लेकिन सहकारिता क्षेत्र को अक्सर ज्यादा बदनाम किया जाता है। सहकार भारती का मूल सिद्धांत है- “बिना संस्कार नहीं सहकार और बिना सहकार नहीं उद्धार।” सबसे पहले जरूरी है कि संस्कारवान और ईमानदार लोग सहकारिता से जुड़ें। सहकार भारती का प्रयास रहता है कि समाज के अच्छे और जिम्मेदार लोगों को सहकारी संस्थाओं में लाया जाए। दूसरी महत्वपूर्ण बात है प्रशिक्षण। सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए तो पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार कम होगा। तीसरा कदम है तकनीक और पारदर्शिता। अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, डिजिटल ऑडिट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। इनसे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण संभव होगा।
पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष भी मनाया गया। इससे भारतीय सहकारिता आंदोलन को क्या लाभ मिला?
इसका लाभ काफी बड़ा रहा। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर भारत मंडपम में लगभग 150 देशों की भागीदारी के साथ एक बड़ा सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
दुनिया के विभिन्न देशों में सहकारिता के अलग-अलग मॉडल काम कर रहे हैं। लेकिन एक बड़ी कमी यह है कि समग्र सहकारिता पर विचार करने वाला कोई वैश्विक संगठन नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों जैसे डेयरी, श्रम, बैंक या क्रेडिट के अपने-अपने संघ हैं, लेकिन समग्र सहकारिता पर काम करने वाला संगठन लगभग नहीं है।
इस संदर्भ में सहकार भारती का प्रयास है कि समग्र सहकारिता की सोच को वैश्विक स्तर पर भी बढ़ाया जाए। हमने नेपाल में ‘सहकार नेपाल’ नाम से एक पहल शुरू की है और भविष्य में इसे अन्य देशों तक भी ले जाने की योजना है।


