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इस साल रिकॉर्ड तोड़ सकती है गर्मी, अल नीनो और सुपर अल नीनो से मानसून पर खतरा

हाल ही में विश्व मौसम संगठन (WMO) और यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के आकलन में संकेत मिले हैं कि इस वर्ष प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है

Published: 10:40am, 10 Mar 2026

मार्च की शुरुआत से ही देश के कई हिस्सों में गर्मी तेज होने लगी है। कई राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जो सामान्य से लगभग 5 से 10 डिग्री अधिक माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और प्रशांत महासागर में बन रही जलवायु परिस्थितियां इस असामान्य गर्मी की एक बड़ी वजह हो सकती हैं।

हाल ही में विश्व मौसम संगठन (WMO) और यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के आकलन में संकेत मिले हैं कि इस वर्ष प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। ECMWF के नवीनतम एन्सेम्बल मॉडल के मुताबिक मई तक अल नीनो बनने की संभावना है और अगस्त तक इसके और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।

मॉडल के अनुमान के अनुसार सुपर अल नीनो बनने की लगभग 22 प्रतिशत संभावना जताई गई है, जबकि मजबूत अल नीनो की संभावना करीब 80 प्रतिशत और मध्यम स्तर के अल नीनो की संभावना 98 प्रतिशत तक आंकी गई है। मई से जुलाई के बीच इसके बनने की संभावना करीब 40 प्रतिशत बताई जा रही है। हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे शुरुआती अनुमान मानते हैं और आगे इसमें बदलाव की गुंजाइश भी बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ला नीना चरण अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। इसके साथ ही प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ने लगा है, जो अल नीनो के बनने का संकेत देता है। दो साल पहले भी अल नीनो के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति देखी गई थी और उसी दौरान वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में सामान्य रूप से पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली ट्रेड विंड्स इस समय कमजोर पड़ रही हैं। इसके विपरीत पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली हवाएं मजबूत हो रही हैं, जिससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में जमा गर्म पानी पूर्व की ओर फैलने लगा है। यही प्रक्रिया अल नीनो के विकसित होने और कभी-कभी सुपर अल नीनो बनने की स्थिति पैदा करती है।

अल नीनो के दौरान समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप बदल सकता है। दक्षिणी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।

भारत के संदर्भ में देखा जाए तो अल नीनो आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करता है, जिससे कई बार सामान्य से कम वर्षा दर्ज होती है। हालांकि यदि उसी समय इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) सकारात्मक स्थिति में बनता है, तो यह अल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर सकता है। वर्ष 1997–98 में ऐसा ही देखने को मिला था, जब अल नीनो के बावजूद भारत में सामान्य से बेहतर मानसून दर्ज किया गया था।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। इन्हीं संकेतों के आधार पर भविष्य में मानसून के रुझान का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।

कई शहरों में 40°C के करीब पहुंचा पारा

मार्च के पहले ही सप्ताह में देश के कई शहरों में तापमान तेजी से बढ़ा है।

कुछ प्रमुख शहरों का तापमान- पिलानी (राजस्थान) – 40.2°C, बाड़मेर (राजस्थान) – 40°C, राजकोट (गुजरात) – 40°C, बीकानेर – 39.4°C, चूरू – 39.1°C, जैसलमेर – 39.2°C, अहमदाबाद – 39.4°C

Diksha