गुजरात के शहरी सहकारी बैंक दिवाली से पहले नई करेंसी नोटों की कमी का सामना कर रहे हैं। कई बैंकों का कहना है कि उनकी मांग के मुकाबले बहुत कम नए नोट मिले हैं, जिससे खासकर ₹10, ₹20 और ₹50 के छोटे मूल्यवर्ग की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
गुजरात अर्बन कोऑपरेटिव बैंक्स फेडरेशन (GUCBF) और साउथ गुजरात कोऑपरेटिव बैंक्स एसोसिएशन (SCOBA) ने इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क कर अतिरिक्त आवंटन की मांग की है। GUCBF चेयरमैन ज्योतिंद्र मेहता के अनुसार कई शहरी सहकारी बैंकों को उनकी मांग का केवल करीब 10 प्रतिशत नया कैश मिला है। फेडरेशन ने खासकर छोटे मूल्यवर्ग में अतिरिक्त आपूर्ति की मांग की है।
सहकारी बैंकों के सामने समस्या इसलिए भी अधिक है क्योंकि कई बैंकों के पास अपने करेंसी चेस्ट नहीं हैं और वे नई करेंसी के लिए बड़े बैंकों पर निर्भर रहते हैं। त्योहार के दौरान ग्राहकों की मांग बढ़ने से यह निर्भरता और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि सूरत पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक ने सुरक्षा कर्मियों के साथ टीमों को मुंबई भेजकर नई करेंसी जुटाने की व्यवस्था की है। बैंक प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय तक कमी बनी रहने पर ग्राहकों को असुविधा हो सकती है और वे दूसरे बैंकों की ओर जा सकते हैं। सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए यह मामला त्योहारों के दौरान नकदी आपूर्ति और करेंसी वितरण व्यवस्था में उनकी संस्थागत निर्भरता को भी सामने लाता है।


