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FMCG की ग्रोथ में दिख रहा ग्रामीण भारत का दम, शहरों में ठहराव

जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही में ग्रामीण भारत में FMCG उत्पादों की मांग में गिरावट के बावजूद, शहरी क्षेत्रों की तुलना में चार गुना अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। नीलसनआईक्यू की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे पैक की ओर झुकाव और पारंपरिक व्यापार में वृद्धि जैसे रुझान सामने आए हैं।

Published: 12:43pm, 09 May 2025

साल 2025 की जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान ग्रामीण भारत में उपभोक्ता उत्पादों (FMCG) की मांग में थोड़ी कमी देखने को मिली है, लेकिन शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में यह मांग अब भी चार गुना अधिक रही है। यह जानकारी बाजार अनुसंधान संस्था नीलसनआईक्यू की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तिमाही में ग्रामीण क्षेत्रों में FMCG उत्पादों की मांग 8.4 प्रतिशत रही, जो अक्टूबर-दिसंबर 2024 तिमाही के 9.2 प्रतिशत के मुकाबले कुछ कम है। वहीं, शहरी भारत में यह मांग घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले तिमाही में 4.2 प्रतिशत थी।

FMCG उद्योग में इस तिमाही में कुल मिलाकर 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें 5.1 प्रतिशत वॉल्यूम ग्रोथ और 5.6 प्रतिशत मूल्य वृद्धि शामिल है। रिपोर्ट बताती है कि उपभोक्ताओं में छोटे पैक की ओर झुकाव देखने को मिला है, जो इस बात का संकेत है कि लोग अब जरूरत के अनुसार ही सीमित मात्रा में उत्पाद खरीदना पसंद कर रहे हैं।

खाद्य श्रेणी की तुलना में गैर-खाद्य श्रेणी में उपभोग वृद्धि अधिक रही है। खासकर होम और पर्सनल केयर श्रेणियों में 5.7 प्रतिशत की खपत वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को बल मिला है। वहीं खाद्य तेल और पाम ऑयल जैसी प्रमुख श्रेणियों में उपभोग में गिरावट के चलते खाद्य खपत वृद्धि 6 प्रतिशत से घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई है।

नीलसनआईक्यू इंडिया के एफएमसीजी ग्राहक प्रमुख रूजवेल्ट डिसूजा ने बताया कि कुल मांग में मिला-जुला रुझान है। मुद्रास्फीति में कमी के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन आवश्यक खाद्य वस्तुएं अब भी महंगी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बाजार विकास का प्रमुख कारक बने हुए हैं, जबकि शहरी उपभोक्ता ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

इस तिमाही में पारंपरिक खुदरा दुकानों से होने वाला व्यापार 6.2 प्रतिशत तक बढ़ा है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 5 प्रतिशत था। इसके विपरीत, आधुनिक व्यापार यानी मॉल्स और सुपरमार्केट जैसे प्लेटफॉर्म पर 3.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि आने वाले महीनों में अनुकूल मानसून और कर-सुधार की पृष्ठभूमि में उपभोग में और वृद्धि हो सकती है, जिससे FMCG सेक्टर को मजबूती मिलेगी।

YuvaSahakar Desk