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RBI ने सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस किया रद्द

रिजर्व बैंक ने अपने आदेश में कहा कि सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी और बैंक के पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं थी। साथ ही भविष्य में लाभ कमाने की संभावनाएं भी बेहद कमजोर थीं। RBI के अनुसार बैंक अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति के आधार पर जमाकर्ताओं का पूरा पैसा लौटाने में सक्षम नहीं था।

Published: 16:10pm, 18 May 2026

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक (Sarvodaya Co operative Bank) का बैंकिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, यदि इस बैंक को आगे कारोबार जारी रखने की अनुमति दी जाती, तो इससे आम जनता और जमाकर्ताओं के हितों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था।

रिजर्व बैंक द्वारा 12 मई 2026 को जारी आधिकारिक आदेश के तहत, इस को-ऑपरेटिव बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियों और व्यावसायिक लेन-देन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। रिजर्व बैंक ने इस कार्रवाई के पीछे बैंक की अत्यंत खस्ताहाल वित्तीय स्थिति और बैंकिंग नियमों की अनदेखी को मुख्य कारण बताया है।

लाइसेंस रद्द करने के मुख्य कारण

केंद्रीय बैंक ने सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के खिलाफ इस सख्त कार्रवाई के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत किए हैं:

  • पूंजी की भारी कमी: बैंक के पास वर्तमान में न तो पर्याप्त पूंजी (Capital) बची थी और न ही भविष्य में मुनाफे या कमाई की कोई ठोस संभावना दिखाई दे रही थी।

  • भुगतान करने में असमर्थता: बैंक की वित्तीय स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी थी कि वह अपने मौजूदा जमाकर्ताओं का पूरा पैसा वापस लौटाने में पूरी तरह असमर्थ था।

  • वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन: बैंक प्रशासन बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 11(1) और धारा 22(3) के कई अनिवार्य नियमों और प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा।

  • जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा: रिजर्व बैंक का स्पष्ट मानना था कि जनहित और ग्राहकों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए इस बैंक के परिचालन को रोकना अनिवार्य हो गया था।

ग्राहकों के पैसों का अब क्या होगा?

लाइसेंस निरस्त होने के बाद बैंक के ग्राहकों में अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंता स्वाभाविक है, परंतु स्थापित नियमों के अनुसार उनका पैसा पूरी तरह नहीं डूबेगा। बैंक के लिक्विडेशन (परिसमापन) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रत्येक खाताधारक ‘जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम’ (DICGC) के माध्यम से अपनी जमा राशि का दावा करने के लिए पात्र होगा।

DICGC के नियमों के अंतर्गत, प्रत्येक जमाकर्ता को उसके बचत, चालू या सावधि जमा खाते पर अधिकतम ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) तक की बीमा राशि वापस प्रदान की जाती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिन ग्राहकों की कुल जमा राशि 5 लाख रुपये या उससे कम है, उनका पूरा पैसा पूरी तरह सुरक्षित है।

आरबीआई द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के अधिकांश खाताधारकों को वित्तीय नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा। बैंक द्वारा प्रस्तुत वित्तीय विवरणों के मुताबिक, इसके लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता ऐसे हैं जिनकी कुल जमा राशि ₹5 लाख की सीमा के भीतर है। फलस्वरूप, इन सभी ग्राहकों को DICGC बीमा योजना के तहत उनकी पूरी की पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी।

YuvaSahakar Desk

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