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MP में टले सहकारी समितियों के चुनाव, पहले होगा पुनर्गठन

मध्यप्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव एक बार फिर स्थगित कर दिए गए हैं। अब सरकार ने पुनर्गठन प्रक्रिया शुरू करते हुए अगस्त तक नई समितियों के गठन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके चलते चुनाव अब सितंबर के बाद ही संभव होंगे।

Published: 10:00am, 29 May 2025

मध्य प्रदेश सरकार ने प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के चुनाव को एक बार फिर स्थगित कर दिया है, जिससे लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके स्थान पर सरकार ने सहकारी समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है, जिसके तहत प्रत्येक जिले में मौजूदा समितियों की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सहकारिता विभाग को अगस्त 2025 तक की समयसीमा दी गई है। इसके परिणामस्वरूप, समितियों के संचालक मंडल और अन्य पदों के लिए चुनाव अब सितंबर 2025 के बाद ही संभव हो पाएंगे।

प्रदेश में पिछले 12 वर्षों से सहकारी समितियों के चुनाव नहीं हो सके हैं। इस दौरान कई बार चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे बीच में ही रोक दिया गया। हाल ही में विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, जिसके बाद सरकार ने सहकारिता विभाग को सदस्यता सूची तैयार करने और पुनर्गठन प्रक्रिया को मई से जुलाई तक पूरा करने का निर्देश दिया था। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। पहले भी जबलपुर हाईकोर्ट के निर्देश पर चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन उसे भी स्थगित कर दिया गया था।

रीवा-मऊगंज जिले में वर्तमान में 148 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां कार्यरत हैं। पुनर्गठन के तहत इनमें 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जिसके अंतर्गत 37 नई समितियां गठित होंगी। इनमें से 26 समितियां रीवा जिले और 11 मऊगंज जिले में स्थापित की जाएंगी। सरकार ने प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक नई समिति गठित करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। हालांकि, रीवा में उप पंजीयक का पद रिक्त होने के कारण पंजीयन प्रक्रिया में बाधा आ रही है। वर्तमान में प्रभार के आधार पर कार्य चल रहा है, और सीधी के उप पंजीयक को इस जिम्मेदारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

सहकारी समितियों में समय पर चुनाव न होने के कारण प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। मध्य प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1960 के अनुसार, प्रशासक का कार्यकाल अधिकतम दो वर्ष का हो सकता है, लेकिन प्रदेश में पिछले सात वर्षों से अधिकांश समितियां प्रशासकों के अधीन संचालित हो रही हैं। इस स्थिति ने सहकारी तंत्र की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। जबलपुर हाईकोर्ट में इस संबंध में कई याचिकाएं दायर की गईं, और कोर्ट ने भी चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। विधानसभा में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठा, जिसके बाद सरकार ने सहकारी तंत्र को पंचायत स्तर तक विस्तारित करने का निर्णय लिया।

सहकारिता विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि नई समितियों का गठन जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक पूरा किया जाए। हालांकि, पंचायत स्तर पर प्रत्येक गांव में समिति गठित करना तकनीकी और प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। मध्य प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1960 के तहत समितियों के गठन के लिए कम से कम 20 विभिन्न परिवारों के सदस्यों की आवश्यकता होती है। MP सरकार का कहना है कि यह कदम सहकारी तंत्र को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

YuvaSahakar Desk