केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसी किसान-केंद्रित AgriVoltaics नीति की जरूरत बताई है, जिसमें किसान एक ही जमीन से फसल और बिजली दोनों का उत्पादन कर सकें। 7वें AgriVoltaics World Conference के उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार कृषि उत्पादन को प्रभावित किए बिना होना चाहिए, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए।
AgriVoltaics मॉडल में खेतों के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जबकि नीचे खेती जारी रहती है। चौहान ने कहा कि पैनलों की ऊंचाई, दूरी, कृषि मशीनों की आवाजाही, फसल चयन और खेती के चक्र का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण जरूरी है। वर्षा जल निकासी और संग्रह की व्यवस्था भी होनी चाहिए ताकि मिट्टी कटाव रोका जा सके और जल संरक्षण बढ़े।
उन्होंने विश्वसनीय ग्रिड कनेक्टिविटी, बिजली की सुनिश्चित खरीद और किसानों को पारदर्शी तथा समयबद्ध भुगतान पर जोर दिया। Farmer Producer Organisations, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को भी संचालन, मरम्मत और रखरखाव से जोड़ने की बात कही गई।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि TERI अध्ययन के अनुसार देश की 47.5 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि AgriVoltaics के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त है। इससे फसल उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि और लगभग 3.32 लाख स्थानीय पूर्णकालिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।सरकार PM-KUSUM के अगले चरण में एक महत्वाकांक्षी AgriVoltaics कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है।


