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मध्य प्रदेश में सहकारिता विस्तार अभियान, 10 लाख नए किसान बनेंगे सदस्य

15 मई तक खास कैंप लगेंगे, जहाँ सिर्फ 600 रुपये देकर किसान मेंबर बन सकते हैं। इसमें 10 लाख नए लोगों को जोड़ने का टारगेट है, ताकि उन्हें बिना ब्याज का लोन और खाद-बीज आसानी से मिल सके।

Published: 13:11pm, 16 Apr 2026

भारत सरकार की सहकारिता को गांव-गांव तक सशक्त बनाने की नीति के अनुरूप मध्य प्रदेश में सहकारी ढांचे के विस्तार की दिशा में व्यापक अभियान शुरू किया गया है। राज्य सरकार ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के उद्देश्य से सदस्यता अभियान प्रारंभ किया है, जिसके तहत लगभग दस लाख नए किसानों को सहकारी समितियों का सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अभियान के अंतर्गत किसानों से मात्र 600 रुपये शेयर कैपिटल लेकर उन्हें सहकारी समितियों से जोड़ा जाएगा। सदस्यता विस्तार के लिए राज्यभर में 15 मई तक विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के आयोजन में सहयोग के लिए National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) द्वारा प्रति शिविर एक हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 60 लाख किसान सहकारी समितियों के सदस्य हैं।

प्रदेश में सहकारी ढांचे को मजबूत करने के लिए 600 नई समितियों के गठन की प्रक्रिया भी जारी है। इसके साथ ही पात्र किसानों को सहकारिता से जोड़कर कृषि क्षेत्र में संस्थागत समर्थन को और व्यापक बनाने की योजना बनाई गई है।

मध्य प्रदेश में इस समय लगभग साढ़े चार हजार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां (पैक्स) संचालित हैं, जिनसे करीब 68 लाख किसान जुड़े हुए हैं। राज्य में लगभग दस लाख ऐसे किसान भी हैं जो पात्रता होने के बावजूद अभी तक सहकारी समितियों के सदस्य नहीं बन पाए हैं। इन्हीं किसानों को सहकारिता से जोड़ने के उद्देश्य से 14 अप्रैल को Ambedkar Jayanti के अवसर पर विशेष सदस्यता अभियान प्रारंभ किया गया है, जो 15 मई तक चलेगा।

इस अभियान के दौरान छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों तथा सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सदस्य बनाया जाएगा, ताकि सहकारिता के माध्यम से उन्हें कृषि क्षेत्र में आर्थिक और संस्थागत समर्थन मिल सके।

सहकारी समितियों से जुड़ने वाले किसानों को भूमि के आधार पर साख सीमा निर्धारित कर बिना ब्याज के अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा समितियों के माध्यम से किसानों को खाद, बीज और कीटनाशकों जैसी कृषि आवश्यकताओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। यदि सहकारी संस्थाओं को लाभ प्राप्त होता है तो उसका लाभांश भी किसानों को दिया जाता है।

अधिकारियों के अनुसार राज्य में सहकारिता आंदोलन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नई समितियों का गठन तथा सदस्यता विस्तार दोनों पर समान रूप से कार्य किया जा रहा है। पात्र किसानों को सहकारी ढांचे से जोड़कर कृषि उत्पादन, संसाधन उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

YuvaSahakar Desk

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