देश की अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 8.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा न केवल बाजार के 5.50 प्रतिशत के अनुमान को पीछे छोड़ गया है, बल्कि पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों (42 महीनों) का सबसे ऊंचा स्तर भी है। इससे पहले मार्च 2026 में यह आंकड़ा 3.88 फीसदी था।
ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व उछाल
मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के विश्लेषण से स्पष्ट है कि महंगाई में इस भारी वृद्धि का मुख्य केंद्र ‘फ्यूल एंड पावर’ (ईंधन और ऊर्जा) श्रेणी रही है। मार्च 2026 में इस श्रेणी की महंगाई दर जहां मात्र 1.05 प्रतिशत थी, वहीं अप्रैल में यह सीधे उछलकर 24.71 प्रतिशत पर जा पहुंची। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और विशेषकर मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भारत के थोक बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तेल की सप्लाई बाधित होने और ईरान संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की लागत में वृद्धि हुई है। भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल का सीधा असर घरेलू थोक कीमतों पर पड़ा है।
पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति
आंकड़ों के मुताबिक, कच्चे पेट्रोलियम की थोक महंगाई 88.06 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति निम्नलिखित रही:
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पेट्रोल: महंगाई दर 32.40 प्रतिशत दर्ज की गई (मार्च में यह 2.50% थी)।
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हाई-स्पीड डीजल (HSD): इसमें 25.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
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घरेलू LPG: इसकी महंगाई दर 10.92 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने नकारात्मक (-1.54%) थी।
सरकार ने फिलहाल खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं, लेकिन थोक स्तर पर बढ़ती लागत आने वाले समय में वित्तीय दबाव बढ़ा सकती है।
खाद्य वस्तुओं और प्राइमरी आर्टिकल्स का हाल
राहत की बात यह रही कि थोक बाजार में खाद्य वस्तुओं (Food Inflation) की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। अप्रैल में खाद्य महंगाई 2.31 प्रतिशत रही। प्याज और आलू जैसी बुनियादी सब्जियों के दाम पिछले वर्ष की तुलना में कम होने से आम आदमी को भोजन की थाली पर सीधा असर नहीं पड़ा है। हालांकि, ‘प्राइमरी आर्टिकल्स’ यानी कच्चे माल की महंगाई 6.36 प्रतिशत से बढ़कर 9.17 प्रतिशत हो गई है, जो भविष्य में तैयार माल की कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत है।
मैन्युफैक्चरिंग और कोर WPI पर दबाव
महंगाई का असर अब केवल तेल तक सीमित नहीं रह गया है। मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर भी 3.39 प्रतिशत से बढ़कर 4.62 प्रतिशत हो गई है। ‘कोर WPI’ (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) 5 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो 43 महीनों का उच्चतम स्तर है। यह इस बात का प्रमाण है कि कच्चे माल और धातुओं (Metals) की बढ़ती कीमतों के कारण फैक्ट्रियों में उत्पादन लागत बढ़ रही है।
वाणिज्य मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि मिनरल ऑयल, क्रूड पेट्रोलियम, नेचुरल गैस और मेटल्स की कीमतों में इजाफा होने के कारण थोक महंगाई में यह उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई यानी CPI पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इससे परिवहन, गैस, बिजली, खाने-पीने की वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े उत्पादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
फिलहाल सरकार ने पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG के खुदरा दामों को स्थिर बनाए रखने का प्रयास किया है ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ कम डाला जा सके। हालांकि कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। आने वाले समय में वैश्विक हालात और तेल बाजार की स्थिति पर भारत की महंगाई दर काफी हद तक निर्भर करेगी।


