मार्च 2026 के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 3.40 प्रतिशत (प्रोविजनल) दर्ज की गई है। यह दर फरवरी 2026 में दर्ज 3.21 प्रतिशत की तुलना में थोड़ी अधिक है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर क्रमशः 3.63 प्रतिशत और 3.11 प्रतिशत रही।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर खाद्य महंगाई दर 3.87 प्रतिशत (प्रोविजनल) दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 3.96 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.71 प्रतिशत रही। फरवरी 2026 में यह दर 3.47 प्रतिशत थी।
मूल्य प्रवृत्तियों के विश्लेषण से पता चलता है कि कई प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है। मार्च 2026 में प्याज की कीमतों में 27.76 प्रतिशत, आलू में 19.98 प्रतिशत, लहसुन में 10.18 प्रतिशत, अरहर दाल में 9.56 प्रतिशत और चना में 7.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत कुछ सब्जियों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। टमाटर की कीमतों में 35.99 प्रतिशत और फूलगोभी में 34.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार दक्षिण भारत के कई राज्यों में महंगाई का दबाव अपेक्षाकृत अधिक रहा। तेलंगाना में कुल महंगाई दर 5.83 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 5.94 प्रतिशत दर्ज की गई। आंध्र प्रदेश में यह दर क्रमशः 4.05 प्रतिशत और 5.45 प्रतिशत रही। कर्नाटक में कुल महंगाई 3.96 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 5.89 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि तमिलनाडु में यह क्रमशः 3.77 प्रतिशत और 3.94 प्रतिशत रही। राजस्थान में कुल महंगाई दर 3.64 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 3 प्रतिशत दर्ज की गई।
सरकार द्वारा जारी यह महंगाई आंकड़े संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला पर आधारित हैं, जिसमें वर्ष 2024 को आधार वर्ष माना गया है। महंगाई दर की गणना के लिए देशभर के 1407 चयनित शहरी बाजारों (ऑनलाइन बाजारों सहित) और 1465 गांवों से वास्तविक समय में मूल्य डेटा एकत्र किया जाता है, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करता है।
सरकार के अनुसार अप्रैल 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के आंकड़े 12 मई 2026 को जारी किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी परिस्थितियों तथा आपूर्ति से जुड़े दबावों का असर भी कीमतों की चाल पर देखने को मिल रहा है।


