एम्सतलवीन (नीदरलैंड)।
आक्रामक सेंटर हाफ कप्तान सलीमा टेटे के अनुकरणीय और प्रेरणादाई खेल से भारत ने 16वें एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल में स्थान बनाने से चूकने के बावजूद दुनिया की सभी धुरंधर टीमों के खिलाफ प्रभावी प्रदर्शन किया है। भारतीय टीम ने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी दुनिया की धुरंधर टीमों को बराबरी पर रोक, दक्षिण अफ्रीका पर बड़ी जीत के साथ विश्व और ओलंपिक चैंपियन मेजबान नीदरलैंड के हाथों इकलौती 0-2 से हार के बावजूद दिखाया कि उसे बड़े मंच पर बड़ी टीमों को टक्कर दे रोकना भी आता है।
भारतीय महिला हॉकी टीम ने पूल डी में चीन को गोलरहित बराबरी पर रोक कर एक अंक साथ दूसरे चरण में पूल ई में स्थान बनाया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे चरण में पूल ई का अपना आखिरी मैच में मौके गंवाने के कारण गोलरहित रहने के चलते उससे कुल गोल में पिछड़ कर भारतीय टीम जब सेमीफाइनल की होड़ से बाहर हुई तो उसकी सबसे अनुभवी गोलरक्षक सविता, फुलबैक सुशीला चानू पुखरंबम, स्ट्राइकर नवनीत कौर और आक्रामक मिडफीलडर नेहा के साथ कप्तान सलीमा टेटे की नम आंखें यह कह रही थी उन्हें अपने अंतर्राष्ट्रीय हॉकी करियर में जिंदगी में शायद सबसे बड़ा कारनामा करने का मौका हाथ से फिसलने की कसक कचोट रही थी। यह संभवत: सविता, सुशीला और नेहा का भारत के लिए आखिरी महिला हॉकी विश्व कप है और वे टीम को पदक जिताने की जिद के साथ इसमें उतरी थीं, जिसे वे पूरी करने के बेहद करीब आकर चूक गईं।
सलीमा टेटे की कप्तानी व चीफ कोच शुएर्ड मराइन के मार्गदर्शन में भारतीय महिला हॉकी टीम की 11 खिलाड़ी पहली बार विश्व कप में खेलने उतरी थीं। भारतीय हॉकी टीम का विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इसके पहले संस्करण में 1974 में चौथा स्थान है। भारत एक बार पर फिर यहां भी सेमीफाइनल में स्थान पाने से चूक गया। भारतीय महिला हॉकी टीम 1974 के बाद बृहस्पतिवार को यहां पांचवें-छठे स्थान के लिए जर्मनी से खेलने उतरेगी। भारतीय महिला हॉकी टीम की पुरजोर कोशिश अब जर्मनी पर जीत के साथ विश्व कप के इतिहास में पांचवें स्थान पर रह इसके इतिहास का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की होगी। भारत ने ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को जिस तरह दो दो गोल की बराबरी पर रोका इससे उसमें यह भरोसा आया कि जीवट और संकल्प से ‘चीन की दीवार’ को तोड़ी जा सकती है।
भारत के महिला हॉकी विश्व कप में प्रभावी प्रदर्शन से यह उम्मीद जगी है कि वह अनुशासित होकर खेल आईची-नगोया (जापान) में करीब तीन हफ्ते बाद शुरू होने होने वाले एशियाई खेलों में हर कयास को गलत साबित कर ‘चीन की मजबूत दीवार’ को तोड़ कर पहली बार स्वर्ण पदक जीत सकती है। मजबूत घेरेबंदी और मौका ताड़ कर गोल कर भारतीय महिला हॉकी टीम अब जवाबी हमलों के साथ वूमैन टू वूमैन मार्किंग करने में माहिर जर्मनी पर जीत दर्ज कर इस विश्व कप में अपने अभियान का समापन पांचवें स्थान पर रह कर सकती है। भारत को जर्मनी पर जीत के लिए मौकों को भुनाने के साथ ज्यादा से गोल करने की जरूरत होगी। जर्मनी ने पूल एफ के दूसरे चरण में आखिरी मैच में स्पेन को 4-1 से हरा कर पहली जीत दर्ज की जबकि वह अर्जेंटीना और बेल्जियम से हार गई। भारत को जर्मनी पर जीत के साथ पांचवां स्थान पाने के लिए अपनी पासिंग और रिसिविंग बेहतर करने के साथ गोल के मौके भी भुनाने होंगे। जर्मनी की वूमैन टू वूमैन मार्किंग तोड़ने में मध्यपंक्ति की सबसे मजबूत कड़ी नेहा और अनुभवी फुलबैक पर ओवरलैप कर आगे टीम के हमलों में जान डालने वाली सुशीला चानू के साथ खुद कप्तान सलीमा टेटे और सबसे अनुभवी स्ट्राइकर नवनीत कौर की भूमिका अहम रहेगी। इनके साथ सबसे अहम होगी भारत की दोनों गोलरक्षक सविता और बिच्छू देवी खरीबम की चौकसी। गोलरक्षक सविता और बिच्छू भारत की रक्षापंक्ति की आखिरी दीवार है जिसे तोड़ना जर्मनी के लिए भी बड़ी चुनौती साबित वाला है।
भारत को जर्मनी पर जीत के लिए उसके लिए सबसे ज्यादा तीन- तीन गोल करने वाली कप्तान लिज नोल्टी व जिती फ्लीशुल्ज के साथ योहना हचेनबर्ग व सारा स्ट्रॉस की मजबूत चौकसी करनी होगी। जर्मनी ने अब पहले और दूसरे दोनों चरण को मिलाकर 13 गोल किए हैं जबकि पांच गोल खाए हैं। वहीं भारत ने पांच मैचों में आठ गोल किए और पांच खाए है। भारत के लिए स्ट्राइकर ऑलराउंडर नवनीत कौर और दीपिका सहरावत ने दो दो तथा स्ट्राइकर ललरेमसियामी, सुनीलिता टोपो, इशिका चौधरी और सुशीला चानू पखरंबम ने एक एक गोल किया। भारत ने अब तक इस महिला हॉकी विश्व कप में अब तक पांच मैदानी गोल करने के साथ तीन पेनल्टी कॉर्नर पर दागे हें। जर्मनी के खिलाफ भारत के गोल करने का दारोमदार एक बार फिर नवनीत ,दीपिका सहरावत, नवोदित बलजीत कौर, इशिका और सुनीलिता टोपो पर रहेगा। भारतीय टीम को जर्मनी जैसी दुनिया की बड़ी टीम के खिलाफ बड़े मंच बेहतर पासिंग और रिसीविंग की जरूरत है। भारत को जीतने के लिए गोल,गोल और गोल की जरूरत है।
भारत को दूसरे चरण में पूल ई के आखिरी मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोल करने के करीब तक नहीं पहुंचना भारी पड़ी था। अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में कामयाबी के लिए वैयक्तिक कौशल से ज्यादा अहम है पासिंग और रिसिविंग। भारत की खिलाड़ी जितना गेंद को एक दूसरे को पास देकर खेलेगी उतने ही गोल करने के मौके बेहतर हो जाएंगे। भारत की कप्तान सलीमा टेटे ने कहा कि भी उन्होंने अपनी साथियों से जो कुछ बीत गया है उसे अतीत मान कर जीत के साथ समापन करने पर अपना पूरा ध्यान लगाने को कहा है।
पांचवें-छठे स्थान का मैच : भारत बनाम जर्मनी (गुरुवार, भारतीय समयानुसार शाम साढ़े सात बजे से)।


