उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अब मान्यता और नवीनीकरण के लिए निर्धारित शुल्क देना होगा। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने कक्षा 1 से 8वीं तक के संस्थानों के लिए 5 हजार रुपये और कक्षा 9 से 12वीं तक के संस्थानों के लिए 7,500 रुपये शुल्क तय किया है। इससे मान्यता प्रक्रिया को लेकर संस्थानों में बना असमंजस दूर होगा।
प्रदेश में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता के लिए नियमावली जारी होने के बाद भी शुल्क तय नहीं हो पाया था। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से ही मान्यता लेनी होगी।
इसके साथ ही प्राधिकरण ने धार्मिक शिक्षा के लिए कक्षा 1 से 8वीं तक का पाठ्यक्रम भी तैयार कर लिया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, यह पाठ्यक्रम सभी समुदायों से मिले सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। एनईपी 2020 के अनुरूप इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। इसमें कक्षा 1-2 को आधारभूत, कक्षा 3-5 को प्रारंभिक और कक्षा 6-8 को मध्य स्तर में रखा गया है।


