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EXCLUSIVE: इफको बोर्ड ने दो डायरेक्टर को दिया एक्सटेंशन, भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे एके गुप्ता को नहीं मिला मौका

इफको के बोर्ड ने ज्वाइंट एमडी और फाइनेंस डायरेक्टर राकेश कपूर और कॉरपोरेट सर्विसेज डायरेक्टर बिरिंदर सिंह को एक और एक्सटेंशन देने का फैसला किया है। जबकि भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे आईटी डायरेक्टर एके गुप्ता को यह मौका नहीं मिला। इफको चेयरमैन दिलीप संघाणी की अध्यक्षता में 21 जनवरी को हुई बोर्ड मीटिंग में दोनों डायरेक्टर को 2-2 साल का एक्सटेंशन देने का फैसला किया गया।

Published: 15:27pm, 23 Jan 2026

देश की सबसे बड़ी फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव इफको के बोर्ड ने ज्वाइंट एमडी और फाइनेंस डायरेक्टर राकेश कपूर और कॉरपोरेट सर्विसेज डायरेक्टर बिरिंदर सिंह को एक और एक्सटेंशन देने का फैसला किया है। जबकि भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे आईटी डायरेक्टर एके गुप्ता को यह मौका नहीं मिला। इफको चेयरमैन दिलीप संघाणी की अध्यक्षता में 21 जनवरी को हुई बोर्ड मीटिंग में दोनों डायरेक्टर को 2-2 साल का एक्सटेंशन देने का फैसला किया गया।

राकेश कपूर नवंबर 2011 से इफको के बोर्ड में डायरेक्टर हैं। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें लगातार एक्सटेंशन मिलता रहा है। वह पिछले करीब नौ साल से एक्सटेंशन पर हैं और अब एक बार फिर उन्हें एक्सटेंशन मिला है। वह नवंबर 2001 से इफको के डायरेक्टर हैं। इसी तरह, बिरिंदर सिंह भी पिछले करीब पांच साल से एक्सटेंशन पर चल रहे हैं। उन्हें अगस्त 2017 में डायरेक्टर बनाया गया था। इफको चेयरमैन दिलीप संघाणी ने कुछ महीनों पहले ही यह घोषणा की थी कि एक्सटेंशन पर चल रहे लोगों को और एक्सटेंशन नहीं मिलेगा ताकि नए लोगों को मौका मिल सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि अगर जरूरत होगी तो एक्सटेंशन पर चल रहे लोगों की सेवा जरूर ली जाएगी।

एके गुप्ता पर ड्रोन घोटाले का आरोप

आईटी डायरेक्टर एके गुप्ता को एक्सटेंशन देने से बोर्ड ने मना कर दिया है। 1 फरवरी से उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी। वह मई 2022 में डायरेक्टर बनाए गए थे और पिछले करीब तीन साल से  एक्सटेंशन पर हैं। वो आईटी सेवाओं के अलावा ई-कॉमर्स विभाग के भी हेड हैं। एके गुप्ता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे जो इंटरनल जांच में सही पाए गए। इसे देखते हुए ही उन्हें एक्सटेंशन नहीं दिया गया।

एके गुप्ता

दरअसल, इफको ने नैनो फर्टिलाइजर के छिड़काव को बढ़ावा देने के लिए किसानों, कृषि सहकारी समितियों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को 2500 एग्री ड्रोन बांटने का फैसला किया था। साथ ही 5000 ग्रामीण उद्यमियों को निःशुल्क प्रशिक्षण देने की बड़ी पहल की थी। इसे बाद में केंद्र सरकार की नमो दीदी ड्रोन योजना से भी जोड़ दिया गया था। इसके तहत ये ड्रोन किसानों को दिए गए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और आधुनिक कृषि अपना सकें। यह देश में किसी भी सहकारी संस्था द्वारा की गई एग्री ड्रोन खरीद और वितरण का सबसे बड़ा अभियान था। एग्री ड्रोन के साथ बैटरी, इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन, जेनरेटर और मरम्मत का सामान भी दिया गया। इसके लिए किसानों से सिर्फ सिक्योरिटी मनी जमा करवाई गई थी। ड्रोन चलाने और नैनो फर्टिलाइजर के छिड़काव का मुफ्त प्रशिक्षण भी इफको की ओर से ही दिया गया। खेती को आधुनिक बनाना, लागत कम करना, समय बचाना और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना इसका मकसद है।

एग्री ड्रोन खरीद और वितरण का प्रोजेक्ट कई सौ करोड़ रुपये का था जिसकी जिम्मेदारी आईटी डायरेक्टर एके गुप्ता को दी गई थी। एग्री ड्रोन खरीद के लिए कंपनी का चयन करने से लेकर इससे जुड़े अन्य कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी थी। इसी में उन पर घपला करने की लगातार शिकायत इफको मैनेजमेंट और चेयरमैन दिलीप संघाणी को मिल रही थी। इन शिकायतों की जब इंटरनल जांच की गई तो आरोप सही पाए गए।

YuvaSahakar Team