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सहकारी चुनाव प्राधिकरण का बड़ा फैसला, बोर्ड में परिवार के कई सदस्य नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

प्राधिकरण का मानना है कि यदि बोर्ड के अधिकांश सदस्य एक ही परिवार से हों, तो यह सहकारी समितियों के निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। यह निर्णय बोर्ड के सदस्यों के बीच घनिष्ठ पारिवारिक संबंधों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से लिया गया है।

Published: 11:31am, 09 Jul 2025

बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शी, निष्पक्ष और संतुलित शासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्रीय सहकारी चुनाव प्राधिकरण ने एक ही परिवार से कई व्यक्तियों के निदेशक मंडल के लिए नामांकन पर रोक लगा दी है। यह फैसला उन मामलों में लागू होगा, जहां नामांकित उम्मीदवारों में से अधिकांश के बीच रक्त संबंध स्थापित हों।

प्राधिकरण ने पाया कि यदि किसी सहकारी समिति के बोर्ड में अधिकतर सदस्य आपसी पारिवारिक संबंधों में बंधे हों, तो इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में पक्षपात, हितों के टकराव और निष्पक्षता के अभाव की गंभीर संभावनाएं पैदा होती हैं। बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम की धारा 41(6) के अनुसार, यदि किसी निर्णय में बोर्ड के किसी सदस्य का व्यक्तिगत हित जुड़ा हो, तो उसे उस बैठक में भाग लेने से वंचित कर दिया जाता है। लेकिन यदि ऐसे सदस्य बहुसंख्यक हों, तो पूरा निर्णय ही बाधित हो सकता है।

साथ ही, प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही परिवार से कई उम्मीदवारों की भागीदारी से अक्सर किसी विशेष राज्य या क्षेत्र का अधिक प्रतिनिधित्व हो जाता है, जिससे बहु-राज्यीय संस्थाओं में संतुलन बिगड़ता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अधिनियम की धारा 45(एल) और चुनाव नियमों के नियम 19(एफ)(ई) को लागू करते हुए प्राधिकरण ने ऐसे नामांकन को अमान्य घोषित करने की व्यवस्था की है।

इसके अलावा, प्राधिकरण ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बहु-राज्य सहकारी समितियों के चुनावों में भाग लेने को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह दिशा-निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के 21 फरवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन के अनुरूप हैं, जिसके अनुसार सरकारी कर्मचारी अधिकतम दो कार्यकाल या पांच वर्ष तक ही किसी निर्वाचित पद पर रह सकते हैं।

हालांकि, चुनाव लड़ने से पहले उन्हें सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नामांकन प्रक्रिया के दौरान अब निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे उम्मीदवारों से “स्व-घोषणा” प्राप्त करनी होगी, जिसमें उनके पद, सदस्यता संख्या, पहले के कार्यकाल और अनुमति की जानकारी शामिल होनी चाहिए। इसके लिए नामांकन पत्र में विशेष रूप से एक अनुलग्नक जोड़ा गया है जो केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 15(1)(सी) के अंतर्गत जानकारी एकत्र करेगा।

यह निर्णय सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संतुलन सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सभी निर्वाचन अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

YuvaSahakar Desk