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उपभोक्ता आयोग का महत्वपूर्ण फैसला, बीमा कंपनी को ब्याज सहित इलाज खर्च लौटाने का आदेश

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर कोई ठोस साक्ष्य नहीं था, जिससे उनके तर्क अस्वीकार्य पाए गए।

Published: 11:30am, 19 Jul 2025

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। आयोग ने एक बीमा कंपनी को नोएडा सेक्टर-33 निवासी ताराचंद्रा के निमोनिया इलाज के लिए दावा की गई राशि 4,64,143 रुपये को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी न केवल अपने वादों को पूरा करने में असफल रही, बल्कि सेवा में कमी और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार के लिए भी जिम्मेदार है, जिससे शिकायतकर्ता को आर्थिक और मानसिक क्षति हुई।

मामला ताराचंद्रा से संबंधित है, जिन्हें 26 अप्रैल 2021 को निमोनिया के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पास 11 जुलाई 2020 से 10 जुलाई 2021 तक वैध एक मेडिकल बीमा पॉलिसी थी, जिसके लिए उन्होंने 14,803 रुपये का प्रीमियम भुगतान किया था। इलाज के बाद, अस्पताल ने 3 जून 2021 को बीमा कंपनी को 4,64,143 रुपये का क्लेम भेजा। हालांकि, बीमा कंपनी ने 17 अक्टूबर 2021 को क्लेम को अस्वीकार कर दिया, यह दावा करते हुए कि इलाज से संबंधित दस्तावेज जाली और मनगढ़ंत हैं, और पॉलिसी धोखाधड़ी के आधार पर रद्द की गई थी।

क्लेम अस्वीकृति के बाद, ताराचंद्रा ने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया। आयोग के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य श्रीमती अंजु शर्मा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी अपने दावों को सिद्ध करने में विफल रही और दस्तावेजों को जाली साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। इसके अलावा, कंपनी का उपभोक्ता के साथ व्यवहार अनुचित और सेवा में घोर लापरवाही को दर्शाता है।

आयोग ने अपने आदेश में बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान की तारीख तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ 4,64,143 रुपये की पूरी राशि 30 दिनों के भीतर लौटाए।

YuvaSahakar Desk

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