विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले 2026 के नियमों की केंद्र सरकार एक बार फिर समीक्षा कर सकती है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह इन नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने पर विचार कर रही है।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि सरकार विद्यार्थियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रयास यह सुनिश्चित करने का है कि किसी भी वर्ग के छात्रों में असंतोष या आशंका की स्थिति न बने।
सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि इस प्रक्रिया में सभी विद्यार्थियों के हितों की रक्षा होनी चाहिए और युवा पीढ़ी की चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सरकार के रुख के बाद अदालत ने संबंधित याचिकाओं की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।
UGC ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और छात्रों को बेहतर सुरक्षा देने के उद्देश्य से नए समानता नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों ने 2012 के पुराने प्रावधानों की जगह ली थी।
हालांकि, जातिगत भेदभाव की परिभाषा और नियमों के दायरे को लेकर विवाद सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में नए नियमों पर रोक लगाते हुए कहा था कि कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका हो सकती है। फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही लागू हैं।


