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बिहार में मछली पालन: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम, 20 वर्षों में तीन गुना उत्पादन

बिहार में मछली पालन क्षेत्र में पिछले दो दशकों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। राज्य सरकार की योजनाओं और तकनीकी नवाचारों के कारण मछली उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़कर 8.73 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। इस वृद्धि ने ना सिर्फ उत्पादन बढ़ाया बल्कि हजारों लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया है।

Published: 11:26am, 20 Jun 2025

बिहार सरकार द्वारा क्रियान्वित कृषि रोड मैप और मत्स्य संबंधी योजनाओं के माध्यम से राज्य में मछली उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है। जहां 2005 से पहले राज्य का वार्षिक मछली उत्पादन मात्र 2.68 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा 8.73 लाख मीट्रिक टन को पार कर गया है।

राज्य सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना, जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना, निजी तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना, गंगा नदी पारिस्थितिकी तंत्र में नदी पुनर्स्थापन कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं से मछली उत्पादन में तेज़ी आई है और गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के अंतर्गत राज्य के विभिन्न प्रखंडों में 30-30 मत्स्य बाजारों का निर्माण किया जा रहा है ताकि मत्स्य उत्पादकों को उचित मूल्य और बाजार की सुविधा मिल सके।

राज्य में उन्नत तकनीक जैसे बायोफ्लॉक और आरएएस (रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) तकनीक का उपयोग बढ़ा है। अब तक बिहार में 439 बायोफ्लॉक इकाइयां और 15 आरएएस इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा गंगा, गंडक और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों में मछली बीज (जीरा) डालने की प्रक्रिया से भी प्राकृतिक जल स्रोतों में उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। वर्ष 2023-24 में अब तक 61.81 लाख मछली जीरा डाला गया है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता के उदाहरण

1. ज्योत्सना सिंह, पुरा, शिवाजीनगर: ज्योत्सना ने मत्स्य विभाग से 15 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त कर कमल मत्स्य बीज हैचरी की स्थापना की। आज वह न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि 20 अन्य लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रही हैं। उनकी सफलता ने अन्य लोगों को भी मछली पालन की ओर प्रेरित किया है।

2. संजय सहनी, कोची गांव, शिवाजीनगर: मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के तहत संजय प्रतिवर्ष 15 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें 12 से 15 लाख रुपये की आय हो रही है। उनकी सफलता ने दो अन्य किसानों, श्याम बाबु यादव और अशर्फी सहनी को भी इस व्यवसाय से जोड़ा, जो अब 15 से 20 लाख रुपये कमा रहे हैं।

3. डुबैला चौर, सरायगंज: लक्ष्मी सहनी, शीला देवी, प्रमोद कुमार सहनी, रानी कुमारी, और सीती देवी ने 8 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन शुरू किया। ये लोग सामूहिक रूप से 10-15 टन मछली का उत्पादन कर 13 से 18 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।

बिहार सरकार का लक्ष्य मछली पालन को और अधिक सशक्त बनाना है। नई तकनीकों का विस्तार, मत्स्य बाजारों का निर्माण, और मछली पालकों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन प्रयासों से न केवल बिहार मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

YuvaSahakar Desk