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देश में भीषण गर्मी का अलर्ट: कर्नाटक-महाराष्ट्र के ‘एंटी-साइक्लोन’ ने बढ़ाया लू का खतरा

मौसम विभाग ने आम नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच, जब धूप सबसे तीखी होती है, बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस और मौसमी फलों का सेवन करने को कहा गया है।

Published: 15:57pm, 15 Apr 2026

कर्नाटक और उससे सटे महाराष्ट्र के ऊपर सक्रिय प्रतिचक्रवाती परिसंचरण (एंटी-साइक्लोन) के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में मौसम का रुख अचानक बदल गया है। इस प्रणाली के कारण हवा की गति कमजोर हो गई है और वातावरण में स्थिरता बढ़ गई है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसके परिणामस्वरूप सूर्य की तीव्र किरणें सीधे धरातल को गर्म कर रही हैं और तापमान तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस स्थिति के कारण मध्य और दक्षिण भारत के कई राज्यों में गर्मी का प्रभाव तेज हो गया है तथा कुछ क्षेत्रों में लू चलने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार कर्नाटक और महाराष्ट्र के ऊपर बना यह प्रतिचक्रवाती सिस्टम वातावरण में उच्च दबाव की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। इस तरह की परिस्थितियों में हवा का प्रवाह सीमित हो जाता है और बादल बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। इसके कारण दिन के समय तापमान तेजी से बढ़ता है और गर्म हवाएं चलने लगती हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना तथा आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि तेलंगाना और रायलसीमा क्षेत्र में अगले चार दिनों तक लू चलने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा मध्य महाराष्ट्र में अगले दो दिनों तक गर्म हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। वहीं उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में तीन दिनों तक लू जैसी स्थिति बनी रह सकती है। मराठवाड़ा क्षेत्र में भी तापमान सामान्य से अधिक रहने और गर्म हवाएं चलने के संकेत दिए गए हैं।

मौसम विभाग के अनुसार इस प्रतिचक्रवाती प्रणाली का प्रभाव मध्य भारत तक भी महसूस किया जा रहा है। मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में गर्म हवाएं चल सकती हैं और तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है। कई स्थानों पर तापमान पहले ही 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों को दिन के समय तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्वी भारत के राज्यों में भी गर्मी और उमस का असर बढ़ने लगा है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मैदानी क्षेत्रों में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना जताई गई है। इसके कारण हीट इंडेक्स बढ़ सकता है, जिससे लोगों को वास्तविक तापमान से अधिक गर्मी महसूस हो सकती है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिचक्रवाती सिस्टम के दौरान केवल दिन ही नहीं बल्कि रात का तापमान भी अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इससे वातावरण में गर्मी का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है और लोगों को राहत नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। साथ ही प्रशासन को भी हीट एक्शन प्लान को प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि लोगों को बढ़ती गर्मी और लू से बचाया जा सके।

YuvaSahakar Desk