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स्कूलों में शुरू होगी उम्र के अनुरूप सेक्स एजुकेशन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- स्वीकार ली है समिति की सिफारिश

केंद्र सरकार ने देश के स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक एवं उम्र के अनुरूप सेक्स एजुकेशन शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं। अदालत के निर्देश के बाद इसे देशभर में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल यह प्रस्तावित व्यवस्था है और इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया है।

Published: 12:58pm, 15 Jul 2026

केंद्र सरकार ने देश के स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक एवं उम्र के अनुरूप सेक्स एजुकेशन शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं। अदालत के निर्देश के बाद इसे देशभर में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल यह प्रस्तावित व्यवस्था है और इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया है।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के सामने केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में गठित 26 सदस्यीय समिति ने किशोर संबंधों, बाल यौन शोषण और पॉक्सो कानून से जुड़े मामलों का अध्ययन किया है।

समिति ने सुझाव दिया है कि प्राथमिक कक्षाओं से ही बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुसार वैज्ञानिक एवं सुरक्षित जानकारी दी जाए। छोटे बच्चों को शरीर के अंगों की पहचान, निजी अंगों की सुरक्षा, गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत स्वच्छता, ‘ना’ कहने का अधिकार और भरोसेमंद वयस्क से मदद मांगने के बारे में पढ़ाया जा सकता है।

Comprehensive Sexuality Education
Supreme Court

बड़ी कक्षाओं में किशोरावस्था, शारीरिक बदलाव, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, सहमति, सुरक्षित व्यवहार, स्वस्थ संबंध, ऑनलाइन सुरक्षा और बाल यौन शोषण से बचाव जैसे विषय शामिल किए जा सकते हैं। प्रस्तावित पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी NCERT को दी जा सकती है। शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने और अभिभावकों को जागरूक करने की भी सिफारिश है।

विश्व के कई देशों में स्कूल आधारित सेक्स एजुकेशन लागू है। इनमें स्वीडन, नीदरलैंड, जर्मनी, फिनलैंड, फ्रांस, नॉर्वे, डेनमार्क, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ट्यूनीशिया और चिली शामिल हैं। UNESCO और WHO के अनुसार, लगभग 85 प्रतिशत देशों में इससे संबंधित कोई न कोई नीति या कानूनी व्यवस्था मौजूद है।

Jitendra