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लॉजिकल रीज़निंग: स्कूलों में इसे समर्पित विषय का दर्जा क्यों मिलना चाहिए ?

लॉजिकल रीज़निंग यानी तर्कशक्ति समस्या समाधान, क्रिटिकल थिंकिंग और वैज्ञानिक खोज की नींव है। फिर भी यह स्कूल पाठ्यक्रम में अलग विषय के रूप में शामिल नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इसे शुरुआती कक्षाओं से लागू करने पर जोर दिया है, ताकि छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और जीवन दोनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

Published: 13:19pm, 17 Sep 2025

लॉजिकल रीज़निंग यानी तर्कशक्ति, समस्या समाधान, क्रिटिकल थिंकिंग, निर्णय लेने और वैज्ञानिक खोज का आधार है। लेकिन अफसोस की बात है कि आज भी यह स्कूलों के पाठ्यक्रम में एक अलग विषय के रूप में शामिल नहीं है। यदि बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही लॉजिकल रीज़निंग पढ़ाई जाती, तो आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे बैंकिंग, SSC, CAT और CSAT में उन्हें उतनी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता।

इन परीक्षाओं में रीज़निंग का सेक्शन समयबद्ध होता है, जहाँ कई उम्मीदवार सवाल हल न कर पाने के कारण खाली छोड़ देते हैं। खासकर CAT का रीज़निंग सेक्शन बेहद कठिन माना जाता है, जहाँ 5 से 6 लाख उम्मीदवारों में से केवल करीब 800 ही सफल हो पाते हैं। वहीं, CSAT में लॉजिकल रीजनिंग और भी चुनौतीपूर्ण होता है, जो प्रीलिम्स की क्वालिफिकेशन दर को काफी गिरा देता है।

शुरुआती कक्षाओं से जरूरी है तर्कशक्ति का अभ्यास

अगर बच्चों को शुरू से ही रीज़निंग का अभ्यास कराया जाए तो वे पैटर्न पहचानने, गलत विकल्पों को तुरंत हटाने और समस्याओं को सरल तरीके से हल करने में सक्षम हो जाएंगे। यही कारण है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

NEP 2020 ने ‘कंपिटेंसी और इंक्वायरी बेस्ड लर्निंग’ (Competency & Inquiry Based Learning) को बढ़ावा दिया है, ताकि बच्चे रटने के बजाय सोचें, सवाल करें और ज्ञान को लागू करना सीखें। इस नीति ने अन्य विषयों में भी रीज़निंग को जोड़ने की सिफारिश की है, ताकि छात्रों को STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) विषयों में तार्किक सोच का अभ्यास मिल सके।

NEP की मूल्यांकन प्रणाली (Assessment Reforms) भी अब केवल याददाश्त पर नहीं बल्कि समझ और अनुप्रयोग (Application) पर आधारित है, जिसमें रीजनिंग एक अहम कौशल विषय के रूप में सामने आता है। साथ ही, शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) कार्यक्रमों में भी बदलाव लाए जा रहे हैं ताकि शिक्षक बच्चों को रीज़निंग की अवधारणाएँ सरल और रोचक तरीके से समझा सकें।

सिर्फ परीक्षाओं के लिए नहीं, जीवन के लिए भी जरूरी

रीज़निंग की अहमियत सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। विज्ञान और अनुसंधान (R&D) में भी इसका बड़ा योगदान है। उदाहरण के लिए, जब कोविड-19 की नई दवा विकसित की जा रही थी, तब वैज्ञानिकों ने वायरस के आणविक ढांचे, उसके वेरिएंट्स जैसे सिंगल-स्ट्रैंडेड पॉजिटिव RNA जीनोम, म्यूटेशन्स और कोशिकाओं से बंधने की प्रकृति का अध्ययन किया। यह सब तार्किक विश्लेषण के बिना संभव नहीं था।

इसी तरह, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियाँ भी दुश्मन के गुप्त संदेशों को डीकोड करने और आतंकी हमलों को रोकने के लिए लॉजिकल रीजनिंग का इस्तेमाल करती हैं। चिकित्सा, रक्षा खुफिया या दुर्लभ बीमारियों के इलाज जैसे क्षेत्रों में तर्कशक्ति के बिना खोज और नवाचार में देर हो सकती है।

सीखने का मजेदार अनुभव

रीज़निंग पढ़ाई को न सिर्फ उपयोगी बल्कि मजेदार भी बनाती है। कोचिंग सेंटर्स में अक्सर देखा जाता है कि जब कोई अनुभवी शिक्षक कठिन प्रश्न का छिपा हुआ आसान हल बताते हैं, तो छात्र उत्साह से हँस पड़ते हैं।

उदाहरण के लिए, जब छात्र देखते हैं कि 121, 144, 169, 196 और 225 जैसे नंबर लगातार परफेक्ट स्क्वेयर हैं और उनके बीच का अंतर हर बार +2 से बढ़ रहा है, तो उन्हें ‘वाह’ वाला अनुभव होता है। इसी तरह, “LISTEN” और “SILENT” जैसे शब्दों में छिपे समान अक्षरों का राज़ जानकर वे चकित हो जाते हैं।

कक्षा समाप्त होने के बाद भी छात्र ऐसे अनुभव को लंबे समय तक याद रखते हैं। अब समय आ गया है कि लॉजिकल रीज़निंग को कक्षाओं में एक संरचित विषय के रूप में शामिल किया जाए जो परीक्षाओं और वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए बेहतर मस्तिष्क तैयार करेगा।

 

लेखक: प्रशिन दीक्षित, शिक्षा क्षेत्र के जानकार

YuvaSahakar Desk

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