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भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता: युवाओं, किसानों, महिलाओं और उद्योगों को मिलेगा बड़ा लाभ

भारत और यूके के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के बीच व्यापार की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर टैरिफ को कम करने या समाप्त करने के लिए किया गया है। इससे सामानों की कीमत कम होगी। उन्हें दूसरे देश में बेचना आसान होगा। एक दूसरे देश में निर्यात बढ़ेगा, इससे अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलेगा।

Published: 12:44pm, 25 Jul 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर गुरुवार को हस्ताक्षर हुए। इस समझौते को औपचारिक रूप से “सीईटीए” (व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता) नाम दिया गया है। इससे दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार में 34 अरब डॉलर तक की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को महज एक आर्थिक करार नहीं, बल्कि भारत के युवाओं, पेशेवरों, किसानों, महिलाओं और उद्योगों के लिए एक सुनहरा अवसर बताया। यह समझौता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को भी उत्पाद सस्ती दरों पर उपलब्ध कराएगा।

भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता क्या है?

भारत और यूके के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के बीच व्यापार की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर टैरिफ को कम करने या समाप्त करने के लिए किया गया है। इससे सामानों की कीमत कम होगी। उन्हें दूसरे देश में बेचना आसान होगा। एक दूसरे देश में निर्यात बढ़ेगा, इससे अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलेगा।

किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा विशेष लाभ

भारतीय किसानों के लिए यह समझौता बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। ब्रिटेन के प्रीमियम फूड मार्केट में भारतीय खाद्य वस्तुओं जैसे हल्दी, इलायची, दालें और प्रोसेस्ड उत्पादों को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। शुल्क मुक्त पहुँच से अगले तीन साल में इसके निर्यात में 20% से अधिक वृद्धि होने की उम्मीद है। 95 प्रतिशत से ज्यादा कृषि और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट पर जीरो टेरिफ होगा। साथ ही झींगा, टूना और अन्य सी-फूड उत्पादों पर लगने वाला टैक्स जो की अभी 4.2 से 8.5 प्रतिशत के बीच है समाप्त हो जाएगा, जिससे तटीय राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा।

प्रोसेस्ड फूड और बागान उत्पाद

भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर अब ब्रिटेन जैसे बड़े बाजार में मजबूती से प्रवेश कर सकेगा। चाय, कॉफी और मसालों के निर्यातकों को यूरोपीय प्रतिस्पर्धा के बराबर खड़ा होने का मौका मिलेगा। विशेष रूप से भारतीय इंस्टेंट कॉफी को ब्रिटेन के प्रीमियम बाजार में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

चमड़ा, जूते और कारीगरों के लिए नए अवसर

चमड़ा और जूता उद्योग से जुड़े भारतीय एमएसएमई को 23 बिलियन डॉलर के ब्रिटिश बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे छोटे उद्योगों, कारीगरों और विशेष रूप से महिला उद्यमियों को बड़े निर्यात अवसर मिलेंगे।

इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवा उद्योग को भी बढ़ावा

ब्रिटेन भारत का छठा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग निर्यात बाजार है। भारत-यूके एफटीए से इंजीनियरिंग उत्पादों, स्मार्टफोन्स, फाइबर केबल और फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात में भारी वृद्धि की उम्मीद है। भारतीय दवा कंपनियों के लिए ब्रिटेन एक बड़ा बाजार बनकर उभर सकता है।

महिला उद्यमियों और MSMEs को मिलेगी नई उड़ान

एफटीए का उद्देश्य भारत के MSME इकोसिस्टम को मजबूत करना है। महिला कारिगरों द्वारा निर्मित कोल्हापुरी चप्पल जैसे पारंपरिक उत्पाद अब ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क के पहुंच सकेंगे।

Diksha

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